जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इंडियन रेडियोलॉजिकल इमेजिंग एसोसिएशन से पदाधिकारियों ने कहा कि जबलपुर से दिल्ली तक विमान के सफर से भी कम रेडिएशन का खतरा सीटी स्कैन जांच में रहता है। कोरोना महामारी के दौर में छाती तक फैले संक्रमण की जांच में सीटी स्कैन की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। सीटी स्कैन जांच से कैंसर का कोई खतरा नहीं रहता।

एसोसिएशन के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. पुष्पराज भटेले ने बताया कि हाल ही में एम्स दिल्ली के डायरेक्टर व राष्ट्र स्तरीय कोविड कंट्रोल कमेटी के सदस्य डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बयान दिया था कि सीटी स्कैन से कैंसर होता है। उनका यह बयान गैर जिम्मेदाराना है। वर्तमान में इतनी आधुनिक मशीनों से जांच की जाती है जिसकी वजह से रेडिएशन व कैंसर का खतरा मरीज को नहीं रहता है।

उन्होंने कहा कि कई बार आरटीपीसीआर व रैपिड जांच में कोविड का पता नहीं चलता। परंतु लक्षण आने के छठवें दिन सीटी स्कैन कराने पर छाती में संक्रमण का पता चल गया। जिससे मरीज का उपचार शुरू कर उसकी जान बचाई जा सकी। सीटी स्कैन जांच से संक्रमण का पता लगाकर समय रहते बेहतर उपचार किया जा सकता है। सीटी स्कैन जांच के बाद कोरोना के तमाम ऐसे मरीज सामने आए जो होम आइसोलेशन में स्वस्थ हो गए।

जांच से संक्रमण की स्थिति का पता लगाकर सिर्फ गंभीर मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कर साधारण मरीजों को घर में रखा जा सकता है। इससे अस्पतालों में बिस्तर की कमी नहीं होने पाएगी। डॉ. भटेले ने कहा कि कोविड के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जब मरीज के शरीर में संक्रमण था परंतु लक्षण नहीं मिले। कुछ ऐसे भी मिले जो संक्रमण रहित थे परंतु लक्षण कोविड के रहे। इस स्थििति में सीटी स्कैन जांच से संक्रमण की सटीक जानकारी हो पाई। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मरीज का सीटी स्कैन किया जाए यह आवश्यक नहीं है। परंतु छाती में फैले संक्रमण का पता लगाने के लिए यह जांच आवश्यक है।

Posted By: Ravindra Suhane

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