जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में नेशनल टाइगर कन्जर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की ओर से जवाब दिया गया कि दो साल पहले ओडिशा के सतकोसिया भेजी गई मध्य प्रदेश की बाघिन सुंदरी को वापस लाकर कान्हा टाइगर रिजर्व के गौरेला सेंटर में रखने का फैसला लिया गया है। इसके बाद उसे जंगल मे छोड़ दिया जाएगा। इस जवाब को रिकॉर्ड पर लेकर हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका का पटाक्षेप कर दिया गया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने बाघ महावीर की मौत के मामले की न्यायिक जांच की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने यह भी माना है कि एनटीसीए ने जो जांच की है, वह समुचित है।

नोएडा निवासी, वन्य जीव प्रेमी संगीता डोगरा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर महावीर और सुंदरी के मामले की न्यायिक जांच की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सतकोसिया टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा उचित देखभाल नहीं होने के कारण बाघ महावीर की मौत हो गई। वहीं, सुंदरी को सतकोसिया टाइगर रिजर्व से नंदन कानन टाइगर रिजर्व में भेजा गया है। वहां उसे कैद किया गया है। उसकी उचित देखभाल नहीं हो रही है।

ओडिशा में कुनबा बढ़ाने भेजे गए थे बाघ और बाघिन:

सतकोसिया टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या शून्य होने के बाद केंद्र सरकार के निर्देश पर 28 जून 2018 को मप्र से बाघ-बाघिन का जोड़ा सतकोसिया में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए भेजा गया था। इनमें कान्हा से महावीर व बांधवगढ़ से सुंदरी नाम की बाघिन शामिल थी। चार बाघों को और भेजा जाना था, लेकिन मध्य प्रदेश शासन ने इसे टाल दिया। हालांकि वहां के ग्रामीण व मध्य प्रदेश के वन्य विशेषज्ञों ने इसका विरोध किया था। दोनों बाघों को ओडिशा का माहौल रास नहीं आया। महावीर की वहां मौत हो गई। सुंदरी वहां जाकर आक्रामक हो गई। उसे सतकोसिया से नंदन कानन में शिफ्ट कर दिया गया। जहां उसे जू में रखा गया। याचिका में बाघिन की इस दशा को चुनौती देते हुए उसे वापस लेकर वन्य वातावरण में स्वच्छंद कर देने की मांग की गई। सुनवाई के दौरान एनटीसीए की ओर से बताया गया कि बाघिन को वापस लाया जाएगा। वहीं यह भी जानकारी दी गई कि सतकोसिया में बाघों के ट्रांसलोकेशन का काम फिलहाल परिस्थितियों के एनटीसीए की गाइडलाइन के अनुरूप होने तक रोक दिया गया है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में एनटीसीए के जवाब को रिकॉर्ड पर लेकर कहा कि याचिका का मन्तव्य पूरा हो गया। वहीं न्यायिक जांच की मांग से खारिज करते हुए एनटीसीए के प्रोटोकॉल को उचित निरूपित किया।

Posted By: Brajesh Shukla

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