Naidunia Gurukul : जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। आज का युग 'इंटरनेट' का युग है। 21वीं शताब्दी इंटरनेट और वेब मीडिया की शताब्दी मानी जा रही है। इंटरनेट ने मनुष्य के जीवन को एकदम सरल और सुगम बना दिया है। आज का दौर इंटरनेट मीडिया का है। हर आयु वर्ग के लोगों में इंटरनेट नेटवर्किंग साइट्स का रुझान दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। जिसमें छात्र छात्राओं का वर्ग मुख्य रूप से शामिल है।

आज फेसबुक, ट्विटर, गूगल, यू टयूब, व्हाटसएप जैसी कई इंटरनेट मीडिया साइट्स दुनिया को एकसूत्र में बांध रही हैं। सूचना के आदान-प्रदान, विभिन्न जानकारियों से अवगत कराने आदि में इंटरनेट मीडिया एक सशक्त और बेजोड़ माध्यम के रूप में उभर रहा है। किन्तु हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। विद्यार्थी वरी पर इसका प्रभाव सकारात्मक व नकारात्मक दोनों प्रकार से द्ष्टव्य हुआ है। इंटरनेट मीडिया विद्यार्थियों के सभी पक्षों को प्रभावित करता हैं। इसके अन्तर्गत श्रव्य-दृश्य सामग्री आती है। इसके द्वारा सामाजिक संंबंध मजबूत बनते हैं। कोविड महामारी में इसका अनुभव सभी ने किया।

ज्ञान की प्राप्ति और किसी विषय में गहराई से अध्ययन के लिए आनलाइन कम्युनिटीज पर यदि लगन से प्रयास किया जाए तो कोई भी विद्यार्थी महारथ हासिल कर सकता है। इंटरनेट मीडिया के आविर्भाव ने अध्ययन और शिक्षा में नवाचार की गति को उल्लेखनीय तेजी प्रदान की है। इसका दूसरा पक्ष (नकारात्मक) बहुत ही चिंतनीय है। इंटरनेट से ज्ञान प्राप्त करने के लिए समय, ऊर्जा और डेटा की बहुत अधिक खपत होती है। विद्यार्थी वर्ग इसका प्रयोग फिल्में, वीडियो देखने, चैटिंग करने, अनावश्यक जानकारी एकत्रित करने में करते हैं। जिससे उपढ़ाई का स्तर गिरता है तथा विद्यार्थी वर्ग गुमराह होकर साइबर क्राइम जैसे अपराधों को करने लगता है। इस प्रकार कहा जा सकता है इंटरनेट मीडिया अलादीन के चिराग कम नहीं है। यह तो प्रयोगशाला में रखा वह 'परमाणु बम' है जिसका सकारात्मक व नकारात्मक उपयोग विद्यार्थी की सोच व उसकी मनः स्थिति पर निर्भर करता है। -अतुल खण्डेलवाल, प्राचार्य, एकीकृत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पड़रिया कुंडम

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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