जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सुहागी जोन अंतर्गत आने वाला परशुराम वार्ड का करमेता मोहल्ला अनेक समस्याओं से ग्रस्त है। यहां कचरे वाली गाड़ी के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं। इस वजह से घरों के बाहर कचरे के ढेर देखे जा सकते हैं। झाडू नहीं लगती, इस वजह से सड़क पर जगह-जगह कचरे के ढेर देखे जा सकते हैं। कीचड़ और इस मोहल्ले का चोली-दामन का साथ नजर आता है। हर कदम पर कीचड़ के डबरे बन गए हैं। इनमें सुअर लोटते रहते हैं। इस वजह से संक्रामक बीमारी का खतरा बना हुआ है। यहां जितने भी खाली प्लाट हैं, उनकी सूरत कचराघर जैसी हाे गई है। सिर्फ मोहल्ले के लोग ही नहीं दूर-दराज तक से यहां कचरा डालने वाले शान से चले आते हैं। इस वजह से सड़क से गुजरने पर दुर्गंध जीना हराम कर रही है।

नालियों में पालीथिन का अंबार : परशुराम वार्ड करमेता की जितनी भी नालियां हैं, उनमें पालीथिन भरी पड़ी है। कायदे से नगर निगम के सफाई कर्मियों को ये पालीथिन निकाल देनी चाहिए। लेकिन वे ऐसा नहीं करते। इस वजह से गंदा पानी ओवरफ्लो होकर सड़क पर फैल जाता है। बच्चेे खेलने जाते हैं, तो कीचड़ में सनकर घर लौटते हैं। इससे बीमार पड़ जाते हैं।

शाम ढलते ही अंधकार मच जाता है : माेहल्ले के निवासी बताते हैं कि शाम ढलते ही अंधकार मच जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां स्ट्रीट लाइट खराब हैं। कई बार शिकायत के बावजूद सुधार नहीं किया गया। कीचड़ में फंसकर वाहन सवार जमीन पर गिर जाते हैं। इस वजह से उन्हें चोट लग जाती है।

कोरोना के खतरे के बीच नहीं हुआ सैनीटाइजेशन : एक वयोवृद्ध निवासी ने दुख साझा करते हुए बताया कि आसपास के मोहल्लों में कोरोना के खतरे से बचाव के लिए सैनीटाइजेशन किया गया। लेकिन परशुराम वार्ड के करमेता में कभी किसी तरह का कोई छिड़काव नहीं हुआ। इससे मच्छर भिनभिनाते रहते हैं।

पेयजल की सुविधा नाममात्र की : स्थानीय निवासी साफ-सफाई के अभाव के अलावा पेयजल की समुचित आपूर्ति न होने से हलकान हैं। उन्होंने बताया कि बोरिंग का पानी पीने विवश हो जाते हैं। सरकारी नल कभी आया तो आया अन्यथा नलों की टोंटी से पानी निकलता ही नहीं। पाइप लाइन में खराबी दूर करने की शिकायत को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल दिया जाता है।

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आधा दर्जन बार आंदोलन कर चुके है। पार्षद को कई ज्ञापन सौंपे। नगर निगम का घेराव करने तक की योजना बनाई। लेकिन समस्या यथावत है। ऐसा इसलिए क्योंकि कोई घनीघोरी नहीं है। हर बार सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला। इससे जनता का अाक्रोश भड़क चुका है। किसी भी दिन बड़ा आंदोलन तय है।

-सौरभ शुक्ला

नालियों को कवर नहीं किया जा रहा है। इस वजह से गंदगी से जीना हराम हो गया है। इस कदर सडांध फैलती है कि नाक-भौं सिकोड़कर किसी तरह निकल जाते हैं। किसी मेहमान को बुलाओ तो उसके सामने मोहल्ले की दुर्दशा की झांकी खुल जाती है। रिश्तेदारों ने आना कम कर दिया है।

- निखिल यादव

पूरा मोहल्ला परेशान है। हर कोई दिन-रात मोहल्ले की तस्वीर साफ-सुथरी होने की प्रार्थना करता रहता है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कचरे वाली गाडी तो आनी ही चाहिए। लेकिन दूसरे मोहल्ले से उसके म्युजिक की आवाज बस आती है। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन हमारे यहां से नहीं होता।

- आकाश पटेल

हमने कई बार अपनी समस्या का ज्ञापन नगर निगम आयुक्त के नाम सौंपा। महापौर को भी शिकायक करके अपना दर्द बताया। लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस वजह से नारकीय माहौल में जीने की मजबूरी है। वह सुबह कब आएगी, जब करमेता को समस्या-मुक्त मोहल्ला कहा जाने लगेगा।

- प्रशांत पटेल

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परशुराम वार्ड की सफाई व्यवस्था में सुधार लाने के लिए टीम लगाई गई है। नाले-नालियों की सफाई भी कराई जा रही है। वार्ड बहुत बड़ा है इसलिए समय लग रहा है। जल्द ही पूरे वार्ड की सफाई कराई दी जाएगी।

-संतोष अग्रवाल, संभागीय अधिकारी, सुहागी जोन

Posted By: Ravindra Suhane

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