कॉलम- करंट- पंकज तिवारी, जबलपुर नईदुनिया। कोरोना संक्रमण ने पिछले दो दीक्षा समारोह का मजा किरकिरा कर दिया है। विद्यार्थी मेहनत के बाद शोध और स्वर्ण हासिल करते हैं। जिनकी दिली इच्छा सैकड़ों लोगों की भीड़ में प्रतिष्ठित व्यक्ति के हाथ से सम्मान लेने की होती है। पिछले साल जहां आभासी ढंग से दीक्षा समारोह हुआ। वहीं इस बार दीक्षा परंपरागत तरीके से तो हुआ पर संक्रमण फैलने के भय से मास्क अनिवार्य किया गया। इस मास्क ने दीक्षा के रंग को फीका कर दिया। गले में स्वर्ण पदक पहनाने के बजाय विद्यार्थी के हाथ में राज्यपाल ने गोल्ड डालकर सम्मान दिया। राज्यपाल ने विद्यार्थियों का उत्साह तो बढ़ाया लेकिन चेहरे मास्क से ही ढंके रहे। सुरक्षा घेरे के बीच विद्यार्थी राज्यपाल के साथ यादगार चित्र खिंचवाने आतुर थे लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। जिन्होंने फोटो खिंचवाए भी तो उनके चेहरे मास्क में छुपे थे। विद्यार्थियों ने माहौल देखकर इसी पर संतोष जताकर अपनी फोटो खिंचवाई।

संगठन की शिक्षा पर योगेंद्र :

भाजयुमो के महानगर अध्यक्ष योगेंद्र सिंह राजपूत संगठन की लाइन पर हैं। विवादों के बाद संगठन की तरफ से यह चेहरा निकला, जिसे भाजपा के भीतर भले ही पहचान का संकट हो लेकिन संगठन में गहरी पैठ ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचा दिया। शायद संगठन की सीख का नतीजा है कि शहर पहुंचते ही योगेंद्र ने नेताओं के साथ तालमेल बैठाना शुरू कर दिया। पुराने मोर्चा के हाशिए पर पड़े नेताओं को जागृत कर उनकी पूछ परख बढ़ाने की कवायद की। शहर के दिग्गज नेता के घर, दफ्तर में स्नेहभाव के साथ मेलजोल कर रहे हैं जिसके कारण असंतुष्ट नेता भी उनके सादगी से प्रभावित होकर उन्हें नई जवाबदारी के लिए सहर्ष स्वीकार कर रहे हैं। संगठन ने पहले ही योगेंद्र जैसे निर्विवाद चेहरे को लाकर नेताओं के बजाय संगठन को तवज्जो दी है ताकि चुनाव के वक्त मचने वाली उठापटक से कार्यकर्ता और कार्य प्रभावित न हो सकें।

समाजसेवा से राजनीति की सीढ़ी चढ़ने की तैयारी :

ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र पनागर विधायक के पुत्र राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। उनकी राजनीति थोड़ी हटकर है। वे नेतापुत्र की तरह पोस्टर ब्वाय नहीं बन रहे, बल्कि समाजसेवा के जरिए राजनीति की सीढ़ी चढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। समर्थकों के बीच पिता की पहचान जहां महाराज के रूप में है, वहीं इनके पुत्र लोगों के बीच सेवक के तौर पर काम करने में जुटे हैं। खासतौर पर बच्चों और युवाओं के बीच सहयोग, समर्पण का तरीका उन्हें दूसरों से अलग करता है। विधानसभा क्षेत्र के बच्चों की पढ़ाई, खेल हो या सेहत का मुद्दा हर समय कुछ नया कर युवाओं के चहेते बनने की कोशिश में जुटे हैं। कभी पढ़ाई की पढ़ाई के लिए मोबाइल बांटते तो कभी खेल-खिलौने। होनहारों को प्रोत्साहन देने के लिए सम्मान कार्यक्रम किया जाता है। इनकी ये सारी कोशिश राजनीति में क्या रंग लाएगी ये तो चुनावी समय में ही साफ हो सकेगा।

नेताओं की कमजोर दमदारी :

जिस शहर के नेता और जनप्रतिनिधि पर भी सरकार के प्रति गंभीर न हों तो इसे क्या कहेंगे। या तो नेता सिर्फ दिखावे के लिए, खबर बनने के लिए चिट्टी लिखकर खानापूर्ति करते हैं या फिर उनकी अहमियत मंत्री कम आंक रहे। दरअसल, ये बात इसलिए उठी क्योंकि आधा दर्जन नेताओं ने शक्ति भवन से विभाग भोपाल भेजने का विरोध जताया। मुख्यमंत्री तक चिट्टी लिखी। बिजली कर्मचारी नेताओं की चौखट पर पहुंचे। जहां दावा किया वे इस मामले में भोपाल तक जाना पड़ेगा तो जाएंगे। नेताओं की इन बातों से कई नेता भी आश्वस्त हो गए कि अब मामले में कुछ हलचल होगी। 16 दिसंबर 2021 को पावर मैनेजमेंट कंपनी के राजस्व प्रबंधन विभाग के जाने का सिलसिला शुरू हुआ। हफ्तेभर में नेताओं की चिट्टियां लिखना शुरू हो गईं, लेकिन जनवरी आधा गुजर चुका, अभी तक न नेताओं को सरकार का कोई बताने उचित जवाब मिला न विभाग वापस आ सके।

Posted By: Brajesh Shukla

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