सुनील दाहिया, जबलपुर। कोरोना के मद्देनजर मकर संक्रांति पर नर्मदा तटों में मेला व सामूहिक स्नान करने पर धारा 144 का हवाला देकर रोक लगा दी गई थी। लाल बिल्डिंग से लेकर राजकाज संभालने वालों ने नर्मदा पहुंच मार्ग से लेकर तटों के इर्द-गिर्द बेरिकेडिंग तक करवा दी लेकिन इस सख्ती पर आस्था भारी रही। मनाही के बाद बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने न सिर्फ नर्मदा में डुबकी लगाई बल्कि कई तटों में भंडारे भी हुए। लोगों की आस्था और भक्ति भाव को देखते बिना मास्क के घूमने वालों के चालान काटने वाले मैदानी अमले की भी हिम्मत नहीं हुई कि किसी का चालान काट दें। कई तो ऐसे भी रहे जो तटों में हुए भंडारे का प्रसाद लेने पर्दे के पीछे से आगे रहे। उनका अपना तर्क था कि जब संक्रमण के बीच स्वच्छंद राजनीतिक रैलियां हो सकती हैं तो नर्मदा तटों पर उमड़ी भीड़ फिर भी संयमित थी।

पेंशनर होंगे तब न: लाल बिल्डिंग के रिकार्ड में दर्ज 52 हजार से ज्यादा हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन उन्हें मिलती रहे। इसलिए उनका भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। पिछले पांच महीने से चल रहे सत्यापन कार्य के बाद भी शहर के करीब साढ़े आठ हजार ऐसे पेंशनर ऐसे हैं जो भौतिक सत्यापन में दिलचस्पी ही नहीं ले रहे। जबकि लाल बिल्डिंग के अधिकारी उनसे सत्यापन कराने की अपील कर थक गए। पिछले दो महीने से अपील पर अपील की जा रही लेकिन पेंशनर हैं जो संपर्क तक नही साध रहे। अब ऐसे में ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या वाकई साढ़े आठ हजार से ज्यादा हितग्राही पेंशन लेने नहीं आ रहे या सिर्फ कागजों में ही अब तक पेंशन दी जा रही थी। कुछ तो ये भी कहने लगे हैं कि बुढ़ापे में कौन नहीं चाहेगा कि बुढ़ापे में पेंशन रूपी लाठी छूट जाए? लेकिन जब पेंशनर होंगे तब ना।

मातहत कहेंगे खुश है जमाना आज पहली तारीख है: यदि लाल बिल्डिंग के साहब के आदेश पर अमल हुआ तो मातहत माह की पहली तारीख को झूम उठेंगे। ये गुनगुनाते हुए कि खुश है जमाना आज पहली तारीख है..। दरअसल, नए साहब ने शासन के आदेश का हवाला देते हुए ये निर्देश निकाल दिए हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए सभी अधिकारी, कर्मचारियों यहां तक कि पेंशनरों भी को हर माह पहली तारीख को ही वेतन दे दिया जाए। ये अलग बात है कि एक तारीख को पगार देने के निर्देश पहले भी कई मर्तबा जारी किए जा चुके हैं। क्योंकि शासन का ये आदेश 2019 का है। फिर भी पगार माह की पांच तारीख के बाद भी खाते पहुंच रही है। बहरहाल साहब के इस आदेश से खुश लाल बिल्डिंग के कर्मचारी उन्हें साधुवाद देते नहीं थक रहे। वहीं कर्मचारी संघ-संगठन भी आदेश को सहेज कर रखते हुए अब एक तारीख के इंतजार में हैं।

समझदार पर लापरवाह: ये पब्लिक है सब जानती है..। सन 1974 में सुपर स्टार राजेश खन्ना द्वारा अभिनीत फिल्म रोटी का ये गीत ये उस दौर में भी प्रासांगिक था और आज 48 वर्ष बाद भी है। फर्क इतना है कि मौजूदा दौर की पब्लिक पहले से ज्यादा पढ़ी-लिखी और समझदार हो गई है। क्या अच्छा है क्या बुरा सब पता है। लेकिन समझदारी के साथ-साथ कहीं-कहीं वे लापरवाह भी हो चले हैं। वर्तमान में जिस तरह से कोरोना की तीसरी लहर लोगों को चपेट में ले रही है उससे हर तीसरा व्यक्ति महामारी की जद में आ गया है। प्रशासन संक्रमण की रोकथाम के प्रयास तो कर रहा है लेकिन पब्लिक जानती है कि ये प्रयास उनके सहयोग के बिना नाकाफी है। फिर भी समझदार कहे जाने वाले लोग लापरवाह बनकर अब भी बाजारों में अकारण भीड़ बढ़ा रहे हैं। बिना मास्क के घूम रहे हैं। कोरोना के संवाहक बने हैं।

Posted By: Ravindra Suhane

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