कॉलम- करंट- पंकज तिवारी, जबलपुर नईदुनिया। पर्यटन विभाग के नए अध्यक्ष को जबलपुर में पर्यटन को बढ़ावा देने वाली पहल का फीता काटने का मौका मिला। कोरोना संक्रमण के वक्त हुए इस आयोजन के बाद अध्यक्ष संक्रमित हो गए, जिस वजह से उन्हें कुछ दिन घर पर थमना पड़ा। ऐसे में भेड़ाघाट में पर्यटकों को मिलने वाला कैफेटेरिया और लिफ्ट की सौगात का लोकार्पण अटक गया। बरगी के पिछले अनुभव और माहौल देखकर पर्यटन विभाग ने भी बिना भीड़ बुलाए सादगी से ही कैफेटेरिया और लिफ्ट को आम जनता के लिए खोल दिया। इधर, भेड़ाघाट के स्थानीय नेता इस सौगात के लिए दिग्गज नेता को श्रेय दिलाने का प्रयास कर रहे थे। समर्थक लंबे समय से इसके लिए प्रतीक्षारत थे, लेकिन अध्यक्ष के साथ राजनीतिक तालमेल नहीं बनने की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पाया। बता दें कि इसी उधेड़बुन में फंसे अफसरों ने कोरोना के वक्त सादगी से काम निकालने में ही भलाई समझी।

विस्तारक काम के बोझ से परेशान :

भाजपा के अंदर बूथ स्तर पर मतदाताओं से मेलजोल का अभियान चल रहा हैं। मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक से लेकर जमीनी कार्यकर्ता इस अभियान में जुटे हैं। ऐसे वक्त में पार्टी ने आनलाइन साफ्टवेयर एप भी तैयार किया है जिसमें आनलाइन के साथ आफलाइन भी बूथ के मतदाता की कुंडली तैयार करनी है। इस बारीक काम ने कई कार्यकर्ताओं का माथा ठनका दिया है। नेतागीरी को सिर्फ ग्लैमर से जोड़कर देखने वाले कुछ निचले पदाधिकारी तो इस जिम्मेदारी से ऐसे घबराए कि उन्होंने मंडल अध्यक्ष के सामने हाथ खड़े कर दिए। साफ कहा कि इस बारीकी से बूथों में पहुचंकर काम करना मुमकिन नहीं होगा, इससे बेहतर हैं कि पद से ही अलग कर दें। कुछ ने तो इस्तीफे की भी पेशकश करने का दावा किया। मानमनौव्वल करने के बाद जब बात नहीं बनी तो मंडल अध्यक्ष ने भी फौरन पार्टी नियमों का हवाला दिया। इसके बाद कार्यकर्ता अपने अभियान में जुट गए।

पूर्व मंत्री की पुत्र को सेट करने की जुगत :

शहर में एक पूर्व मंत्री अपने नौजवान बेटे को पार्टी के अंदर अहम जिम्मेदारी दिलवाने में जुटे हैं। कभी पार्षद का चुनाव लड़वाया लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद पार्टी में जिम्मेदार पद दिलाने की कोशिश की लेकिन नेता पुत्र होने का नुकसान हुआ। इस बार नेताजी ने युवा मोर्चा के अंदर पुत्र को उचित जगह दिलाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। भोपाल तक इसके लिए दौड़ गए। प्रदेश अध्यक्ष से मिले और बेटे को भी मिलवाया ताकि आशीर्वाद मिल सके। अभी युवा मोर्चा में कार्यकारिणी तय होना है। अध्यक्ष पद से चूकने के बाद महामंत्री के लिए जमीन बनाई जा रही है। इधर, स्थानीय संगठन से नेताजी को किसी तरह का समर्थन नहीं मिल रहा है। इस वजह से पहले ही उनकी नाराजगी बनी हुई है। पूर्व मंत्री अपने बेटे को फिट करने के लिए स्थानीय नेताओं के बजाय प्रदेश के बड़े नेताओं से सीधे संपर्क साध रहे हैं।

डिग्री पूरी करने चलाना होगा पेन :

पहली और दूसरी लहर की तरह तीसरी लहर ने कई विद्यार्थियों को निराश कर दिया। ये वो विद्यार्थी हैं, जिन्हें इस साल भी परीक्षा बगैर दिए ही पास होने की उम्मीद थी। उन्हें लग रहा था कि ओपन बुक के जरिए घर में बैठकर जवाब लिखना होगा। बीते दो साल ऐसा ही हुआ। तीसरी लहर का अंदेशा होते ही विरोध, हंगामे भी खूब हुए। परीक्षाओं को रोका गया। कोरोना संक्रमण बढ़ने का हवाला दिया गया। फिर भी उच्च शिक्षा विभाग नहीं पसीजा। उसने विश्वविद्यालयों पर आफलाइन ही परीक्षा करवाने का दबाव बनाया। रोचक बात ये है कि छात्र संगठन विद्यार्थी परिषद की तरफ से इस बार आनलाइन परीक्षा की वकालत नहीं हुई। शायद राष्ट्रीय अधिवेशन में इस मुद्दे पर पहले ही परिषद की सहमति बन चुकी थी, जिसका नतीजा था कि विद्यार्थी परिषद के अलावा सभी संगठन आफलाइन परीक्षा का विरोध करते दिखे। इधर, मंत्री के बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा की तारीख तय कर दी।

Posted By: Brajesh Shukla

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