करंट कालम- पंकज तिवारी, जबलपुर। सौभाग्य जांच में फंसे अफसर बचने के लिए कानूनी तोड़ निकाल रहे हैं। एक अफसर ने विभाग कार्रवाई का नोटिस सीजीएम एचआर के निकालने पर अपत्ति लेकर इसी बहान कार्रवाई पर विभागीय स्तर पर कोर्ट से रोक लगवा दी। अब विभाग भी ऐसे अफसरों के दांव पेंच से बचने के लिए फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। विभागीय स्तर पर कानूनविदों की फौज बिठाई गई है लेकिन इसमें ज्यादातर कानून का ककहरा भी नहीं जातते हैं वो भी सिर्फ खानापूर्ति कर रहे है कई असल कानूनी लड़ाई लड़ने वालों को तैनात किया गया है ताकि कोई खामी न रह जाए।

जिस संस्थान को रिसर्च करवाना चाहिए वह दूसरों को सुविधा बांट रहा है। एक प्राध्यापक पिछले दिनों एक बैठक में इस मुद्दे पर भड़क गए। उन्होंने निजी की बजाए यूनिवर्सिटी के बड़े—बड़े विभागों को रिसर्च के लिए दुरुस्त करने की बात कही। याद दिलाया कि ये संस्थान प्रमुख रूप से शोध के लिए ही है। इसके बावजूद शोध को छोड़कर बाकी सारे काम यहां पर हो रहे हैं। इधर निजी कालेजों ने यूनिवर्सिटी की लचर कार्यप्रणाली का फायदा उठाते हुए अपने यहां तैयारी पूरी कर ली है लेकिन यूनिवर्सिटी के कर्ता शोध केंद्र बनाने में आनाकानी कर रह हैं। इसका सीधा खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है जिन्हें योग्यता होने के बावजूद शोध कार्य करने का मौका नहीं मिल पा रहा है। इधर यूनिवर्सिटी ने हाल ही में पीएचडी शोध परीक्षा में कई पाठ्यक्रमों को सिर्फ इसी वजह से शामिल नहीं किया क्योंकि उनके शोध केंद्र तय नहीं हो पाए।

रिश्तों ने ढ़हाई विकास में रोड़ा बनी दीवार: प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर हाल ही में कानूनविद् बने भाईसाहब के मकान की दीवार स्मार्ट सिटी के लिए विकास में रोड़ा बन गई। अधिकारी पहले डरते-डरते इसे ढहाने का प्रयास कर चुके थे लेकिन भाईसाहब के सामने उनकी हिम्मत दीवार के करीब फटकने की नहीं हुई है। कई दिनों तक इस दीवार की वजह से यहां होने वाले विकास के कार्य अटके रहे। प्रशासनिक अफसर भी चतुर थे। समझ गए कि कानून के ज्ञाता से नियम और अफसशाही झाड़कर जीतना संभव नहीं था तो रिश्तों को बीच में लाया गया। अफसरों ने स्मार्ट सिटी में काम करने वाले भतीजे को ही चाचा के सामने खड़ा कर दिया। भतीजे को देखकर चाचा भी पसीज गए। उन्होंने भी लंबे समय से अवरोध बनी दीवार को ढहाने के लिए भतीजे के कहने पर हामी भर दी। इधर स्मार्ट सिटी के अफसर भी इस रोड़े के खत्म होते ही विकास के कार्य को करने में जुट गए।

स्थानीय नेता मंच नहीं करेंगे साझा: भाजपा के भीतर वरिष्ठों के प्रति प्रेम जागृत हो गया है। ये परम्परा पहले से है लेकिन पिछले कुछ सालों में इसकी अनदेखी खूब हुई। इस पीड़ा काे वरिष्ठों ने बड़े मंच पर भी साझा की। ऐसे में कई दिग्गजों ने अब वरिष्ठों के सहारे अपनी नींव मजबूत करने का रास्ता इख्तियार किया है। ऐसा ही आयोजन की रूपरेखा हाल में बनी। जिसमें संगठन ने दखल देने का प्रयास किया लेकिन उनकी दखलअंदाजी पसंद नहीं आई। अमृत महोत्सव के नाम पर होने वाले इस आयोजन को पूर्व पार्षद जो लगभग युवा पीढ़ी के नेताओं के सामने विलुप्त हो गए थे उनके हाथों में है। उन्होंने पार्टी संगठन काे इस आयोजन काे राजनीतिक नहीं बनाने की हिदायत दी। इतना ही नहीं स्थानीय नेताओं को भी कार्यक्रम के मंच से दूरिया बनाने की सलाह दे डाली। पार्षद समझ गए थे कि संगठन के दखल बढ़ा तो कई नेता सेंधमारी में जुट जाएंगे।

Posted By: Ravindra Suhane

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