कॉलम- बातों-बातों में- मनोज कुमार दीक्षित, जबलपुर नईदुनिया। सड़क हादसा होने की स्थिति में अब तक बचकर निकलने वालों को पुलिस नेक बनने की सलाह दे रही है। शहर के तीन पत्ती चौक पर पुलिस ने होर्डिंग लगाकर 'एक नेक व्यक्ति' योजना प्रसारित की है। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय कुमार अग्रवाल की तस्वीर से सजे होर्डिंग में स्पष्ट किया गया है कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की जान बचाने पर प्रशस्ति-पत्र और पांच हजार रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा। योजना के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल को गोल्डन आवर यानी जान बचाने के समय में अस्पताल या ट्रामा केयर सेंटर पहुंचाएगा, वह इनाम और प्रशंसा का हकदार होगा। योजना के पीछे अधिकारियों का तर्क है कि मुश्किल घड़ी में अगर पीड़ित को मदद देने वाले हाथ आगे बढ़ते हैं तो कई परिवार टूटने या बिखरने से बचाए जा सकते हैं। योजना बेहतर तो परिणाम भी उम्दा आएंगे।

गरमाया रेत का बाजार :

मां रेवा का सीना छलनी कर रेत निकालने के मामले में अधिकारियों की आंखों की किरकरी रहा जिला अब मुफ्त की रेत लूटने में राजधानी तक नाम कमा रहा है। 31 दिसंबर 2021 के बाद जिले में रेत का निरस्त कर दिया है। 19 दिन गुजर जाने के बावजूद रेत के खेल पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जा सकी है। हालात यह हैं कि नर्मदा के हर घाट पर खुली लूट मची है। ग्वारीघाट से झांसीघाट तक दिनदहाड़े रेवा की तलहटी से मशीनों के जरिए रेत निकाली जा रही है। पहले तो रेत का ठेका लेने वाले या विभागीय अधिकारी रेत की अवैध निकासी पर रोक लगते थे पर अब तो ठेकेदार भी नहीं हैं और विभागीय जिम्मेदार अपनी में मस्त हैं। कुल मिलाकर रेत लूटने की खुली छूट जिले भर में मची है। इधर, अधिकारियों का दावा है कि सब नियंत्रण में है।

सरकारी छल में फंसे छोटे कारोबारी :

अब तक भूमाफिया या रसूखदारों के चंगुल में आम लोगों या व्यापारियों को फंसते देखा या सुना होगा। इस बार मामला बिल्कुल उलट है। शहर के दस से अधिक छोटे कारोबारी बीते एक साल से सरकारी छल में फंसे हैं। मामला गले की हड्डी बना है। न तो उगलते बन रहा न निगलते। दरअसल, आइटी पार्क प्रथम की सफलता के बाद विभाग ने आइटी पार्क-दो योजना पेश की। व्यापारियों ने हाथों-हाथों शासकीय दर पर अपनी जरूरत के मुताबिक प्लाट ले लिए। 300 से अधिक प्लाट लीज पर व्यापारियों को दिए गए। इनमें से दस छोटे कारोबारियों की किस्मत खराब निकली और वे राशि जमा कराकर फंस गए। अब तक उन्हें अपनी जमीन नहीं मिल सकी है। आइटी पार्क ने जो जमीन दस कारोबारियों को आवंटित की थी उस पर शहर की एक बड़ी शिक्षण संस्था दावा कर रही है। मामला कलेक्टर कर्मवीर शर्मा से लेकर विभागीय मंत्री वीरेंद्र कुमार सकलेचा की जानकारी में है।

बामुश्किल समेटा रायता :

महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आंगनबाड़ी चलाने वाले मातहतों के हाल भी निराले हैं। टीकाकरण में तेजी लाने के नाम पर आंगनबाड़ी के मझौले साहब ने ऐसा रायता फैलाया कि बामुश्किल ही समेटा जा सका। साहब का एक आदेश देखकर महिला कार्यकर्ता तिलमिला उठीं। जारी सूची में सभी की ड्यूटी आंगनबाड़ी क्षेत्रों से बदलकर यहां से वहां कर दी गई। सालों से एक ही स्थान पर जमी कार्यकर्ताओं ने साहब के खिलाफ इंटरनेट मीडिया से लेकर कलेक्ट्रेट तक मोर्चा खोल दिया। बात मीडिया तक पहुंचा दी। बेवजह ड्यूटी यहां से वहां करने के मामले में मझौले साहब को जमकर फटकार भी लगी। तब जाकर दो से तीन दिन पहले संशोधित सूची जारी कर दी। जल्द टीकाकरण कराने की सोच रखने वाले साहब ने ऐसा रायता फैलाया कि काम तेज होने की बजाय थम गया। मामला फंसता देख बड़े साहब ने एंट्री मारी और हालात तत्काल नियंत्रण में कराए।

Posted By: Brajesh Shukla

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