जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिला अदालत ने एक अहम फैसले में कहा कि जब आरोपित से स्मैक की जब्ती ही साबित नही की जा सकी, तब उस पर एनडीपीएस एक्ट का केस ही गलत है।

एनडीपीएस के विशेष न्यायाधीश सुजीत कुमार रजक की अदालत ने इस टिप्पणी के साथ आरोपित को निर्दोष करार दे दिया। मक्कानगर, हनुमानताल निवासी हैदर अली की ओर से अधिवक्ता राजेश यादव, ममता यादव, अरुण यादव ने दलील दी कि आरोपित को बेलबाग पुलिस ने 31 अक्टूबर, 2018 को बिना किसी ठोस कारण के उठाया। इसके बाद उससे 180 ग्राम स्मैक की झूठी जब्ती दर्शाते हुए एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया।

सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से पेश किए गए जब्ती के अधिकतर गवाह कोर्ट में मुकर गए। इस पर कोर्ट ने जब्ती का कोई साक्ष्य न पाकर आरोपित को दोषमुक्त कर दिया। राजस्व न्यायालय का क्षेत्राधिकार अलग : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में व्यवस्था दी कि सिविल राइट का निर्धारण सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का विषय है न कि राजस्व न्यायालय के दायरे का विषय है।इसी के साथ याचिका को मंजूर करते हुए आदेश दिया गया कि वसीयत के आधार पर खसरा प्रविष्टि राजस्व के प्रकरण में मान्य नहीं है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता तारा सिया कुम्भारे सहित अन्य की ओर से पक्ष रखा गया।अधिवक्ता आदित्य जैन ने दलील दी कि तहसीलदार ने वसीयत के आधार पर दूसरे पक्ष रामलखन प्रजापति सहित अन्य के पक्ष में राजस्व नामांतरण स्वीकार किया था, जो कि अनुचित था। दरसअल, वसीयत के संबंध में निर्णय देने का अधिकार सिर्फ दीवानी न्यायालय को है।

इस तरह तहसीलदार वसीयत के आधार पर राजस्व रिकाड्र में कोई प्रविष्टि नहीं कर सकता। सिविल कोर्ट के निर्णय के बाद ही राजस्व न्यायालय वसीयत के आधार पर राजस्व रिकार्ड में प्रविष्टि कर सकता है। हाई कोर्ट ने तर्क से सहमत होकर याचिकाकर्ताओं के हक में आदेश पारित कर दिया।

Posted By: Ravindra Suhane

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