जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जीसी मिश्रा की अदालत ने रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने वाली नर्स शाहजहां बेगम की जमानत खारिज कर दी है। न्यायालय ने कहा है कि मामला गंभीर है, ऐसे मामले में जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता है।

अभियोजन के अनुसार ओमती पुलिस ने 13 मई, 2021 को नरेन्द्र सिंह ठाकुर को दो रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए गिरफ्तार किया था। नरेन्द्र सिंह ठाकुर ने बताया कि उसने 12 रेमडेसिविर इंजेक्शन बाम्बे अस्पताल की नर्स शाहजहां बेगम से खरीदे थे। आरोपित के बयान के आधार पर पुलिस ने शाहजहां बेगम को गिरफ्तार किया। जमानत आवेदन में कहा गया कि आरोपित नर्स को झूठा फंसाया गया है। उसके पास रेमडेसिविर इंजेक्‍शन जब्त नहीं किए गए हैं। शासन की ओर से एजीपी अरविन्द जैन ने दलील दी कि आरोपित नर्स के खाते में एक लाख 69 हजार रुपये डाले गए थे। सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपित नर्स की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।

हाइवे व सड़कों के लिए काटे गए पेड़ों की भरपाई क्यों नहीं की : नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने कहा है कि जबलपुर-नागपुर, भोपाल और कटनी सड़क के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में वर्षों पुराने पेड़ काटे गए थे, लेकिन अभी तक काटे गए पेड़ों के बदले में नए पेड़ नहीं लगाए हैं। इस मामले में राज्य सरकार के संबंधित विभागों और नगर निगम को नोटिस भेजा गया है। डॉ. पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि एक एक्सपर्ट कमेटी बनाकर काटे गए पेड़ों की जगह नए पौधे लगाए जाए। पत्र में कहा गया कि जबलपुर-नागपुर सड़क निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ काटने के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाल ही में सुपीम कोर्ट ने 25 मार्च 2021 को अपने निर्णय में कहा है कि एक्सपर्ट कमेटी का गठन कर पेड़ काटने की भरपाई का काम किया जाए।

हाई कोर्ट पहुंचा नर्सों की हड़ताल का मामला : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर ने नर्सों की हड़ताल के खिलाफ याचिका दायर की है। याचिका पर जल्द ही सुनवाई होने की संभावना है। उपभोक्ता मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि कोरोना काल में नर्सों की हड़ताल अवैध है। इसके पूर्व वर्ष 2016 और 2018 में भी नर्सों की हड़ताल के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। दोनों बार हड़ताल समाप्त होने के कारण याचिका वापस ले ली गई थी। हाईकोर्ट ने यह स्वतंत्रता दी थी कि भविष्य में हड़ताल होने पर दोबारा याचिका दायर की जा सकेगी।

Posted By: Brajesh Shukla

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