Jabalpur Crime News जबलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। खनन कारोबार से जुड़े व्यवयायी मुकेश लांबा के 13 वर्षीय पुत्र आदित्य लांबा की अपहर्ताओं ने हत्या कर दी। रविवार सुबह पनागर क्षेत्र के बिछुआ गांव से गुजरी नहर में बालक का शव मिला। मामले में पुलिस ने तीन आरोपितों अधारताल महाराजपुर जबलपुर निवासी मास्टर माइंड राहुल उर्फ मोनू विश्वकर्मा (30), मलय राय (25) और करण जग्गी (24) को गिरफ्तार किया है। इस दौरान अपहरण के मुख्य आरोपित मोनू विश्वकर्मा की मौत हो गई। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अधारताल चौराहे से तीनों आरोपितों का जुलूस निकाला था। पुलिस के अनुसार पत्रकार वार्ता के बाद मोनू विश्वकर्मा की तबीयत खराब हुई। उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। आरोपित की मौत तबीयत खराब होने अथवा पिटाई से हुई, यह पीएम रिपोर्ट के बाद पता चल सकेगा।

पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से फिरौती में दी गई रकम में से सात लाख 66 हजार रुपये जब्त किए। घटना का मास्टर माइंड राहुल व्यवसायी मुकेश लांबा का पूर्व परिचित था। इसी ने पूरी योजना बनाई थी। मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस की जानकारी में पूरा घटनाक्रम होने के बाद भी आरोपितों ने स्वजनों के जरिए तकरीबन आठ लाख रुपये 16 अक्टूबर को फिरौती के रूप में वसूल भी लिए थे।

इसकेे बावजूद पुलिस अपहर्ताओं तक नहीं पहुंच सकी। अपहर्ताओं ने परिजनों से दो करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। इधर, बालक के शव की जानकारी मिलने पर धनवंतरि नगर के व्यापारी सड़कों पर उतर आए। दुकानें बंद कर पुलिस की लापरवाही पर आक्रोश जताया।

पुलिस ने आरोपितों का निकाला जुलूस

पुलिस ने अपहरण के तीनों आरोपितों का रविवार शाम चार बजे अधारताल चौराहे से जुूलूस निकाला। आरोपितों ने बताया कि उन्होंने कर्ज की राशि चुकाने के लिए आदित्य का अपहरण किया था। आरोपित मोनू ने बताया कि बालक ने उसको पहचान लिया था। इसलिए उसकी हत्या कर शव को नहर में फेंक दिया था।

होली से ही बना ली थी योजना

सूत्रों के अनुसार मास्टर माइंड मोनू का परिचित बिहारी नामक युवक, मुकेश लांबा के यहां काम करता था। होली के दिन बिहारी मोनू विश्वकर्मा को अपने साथ लेकर व्यवसायी के घर मिलने के लिए गया था। तब से ही मोनू ने व्यवसायी के घर की आर्थिक जानकारी लेकर पूरी योजना बना ली थी। मोनू ने दो साथी मलय और करण को शामिल कर वारदात के एक महीने पहले से रैकी करना शुरू कर दिया था। मोनू लगातार मुकेश के घर जाता रहा। यही कारण था कि आदित्य मोनू को जानने लगा था।

घर के पास से किया था अपहरण

गुरुवार 15 अक्टूबर की शाम सात बजे आरोपितों ने शहर के धनवंतरि नगर क्षेत्र से आदित्य लांबा का उसके घर के पास से अपहरण कर लिया था। बालक नजदीकी दुकान से बिस्किट लेने के लिए गया था। घटना के पंद्रह मिनट के अंदर आदित्य की मां के फोन पर आरोपितों ने दो करोड़ रुपये फिरौती की मांगी की थी। कब, कहां राशि लाना है यह नहीं बताया था।

इसके बाद आरोपित फोन पर लगातार फिरौती मांगते रहे। जानकारी मुताबिक शुक्रवार 16 अक्टूबर को बालक के पिता मुकेश लांबा ने अपने पड़ोसी संजय मिश्रा के जरिए तकरीबन आठ लाख रुपये अपहर्ताओं तक पहुंचा भी दिए थे। मुख्य आरोपित इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका था इसलिए उसने मोबाइल की लोकेशन लगातार बदली। वारदात दो कारों व दो बाइक का इस्तेमाल किया गया।

मुख्यमंत्री ने दिए अधिकारियों को निर्देश- नाबालिग की हत्या के संबंध में सख्त कार्रवाई करें

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जबलपुर में नाबालिग की हत्या के मामले में भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। भोपाल में आयोजित बैठक में सीएम ने कहा कि ऐसे अपराधियों को समाप्त करने के लिए प्रभावी कार्रवाई हो। किसी भी दोषी को न बख्शा जाए। आइजी इंटेलिजेंस आदर्श कटियार ने बताया कि इस मामले में आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ का ट्वीट-जबलपुर में बुझ गया एक घर का चिराग

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मामले में ट्वीट कर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शराब माफियाओं द्वारा 14 लोगों की जान लेने के बाद अब जबलपुर में अपहरण माफियाओं द्वारा एक मासूम की जान ले ली गई। एक घर का चिराग और बुझ गया। शिवराज सरकार अपहरण माफियाओं से मासूम बालक को वापस नहीं ला सकी।

कटघरे में खाकी-तत्काल सक्रिय नहीं हुई पुलिस

अपहरण और उसके बाद बालक की हत्या के मामले में खाकी की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। गुरुवार 15 अक्टूबर की शाम को बालक आदित्य लांबा (13) का अपहरण किया गया। परिजनों ने एक घंटे के अंदर अपहरण की जानकारी पुलिस को दे दी थी। पुलिस तत्काल सक्रिय नहीं हुई। अगले दिन शुक्रवार 16 अक्टूबर को डीजीपी विवेक जौहरी जबलपुर आए थे।

200 अधिकारियों व जवानों की टीम लगाई

मामले में पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा ने बताया कि हमारी प्राथमिकता थी कि बालक आदित्य को सकुशल बचाया जाए। फोन ट्रेसिंग से लेकर आरोपियों को पकड़ने के लिए 200 अधिकारियों व जवानों की टीम लगाई गई थी। वहीं एसपी इस बात का जवाब नहीं दे सके कि जब इतना बड़ा अमला लगा था तो बच्चे को क्यों बचाया नहीं जा सका।

Posted By: Prashant Pandey

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