जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि, Dengue in Jabalpur। कोरोना का खतरा कम हुआ तो डेंगू फैलाने वाले मच्छर डंक मारने लगे हैं। शहर के सिंधी कैंप व घंटाघर क्षेत्र में डेंगू के दो मरीज सामने आए। इस प्रकार बीते साढ़े माह में डेंगू मरीजों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। जिला मलेरिया विभाग ने सिंधी कैंप व घंटाघर के प्रभावित क्षेत्र में मच्छरों के विनष्टीकरण के लिए अभियान चलाया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रत्नेश कुरारिया ने बताया कि बरसात प्रारंभ होते ही मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जिसे देखते हुए लोगों को मच्छरों के विनष्टीकरण व बीमारियों से बचाव के लिए जागरुक अभियान चलाया जाता है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों की तुलना में 2020-2021 में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया का खतरा कम हुआ है। डेंगू के दो मरीज मिलने पर संबंधित क्षेत्रों में दवा का छिड़काव कराया गया। लार्वा विनष्टीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं।

कूलर, टंकी गमलों में मिले लार्वा: डेंगू के दो मरीज सामने आने के बाद जिला मलेरिया विभाग ने लार्वा का पता लगाने के लिए सर्वे प्रारंभ किया है। डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर मच्छरों के लार्वा मिल रहे हैं। कूलर, छत पर रखी टंकियों, गमलों में मिले लार्वा का विनष्टीकरण कराया गया। घंटाघर के समीप नगर निगम द्वारा निर्माणाधीन भवन परिसर के गड्ढों में भरे पानी में भी डेंगू वाले मच्छर के लार्वा मिले।

जमा न होने दें पानी: जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. आरके पहारिया ने बताया कि डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। बरसात के मौसम में जगह-जगह पानी भर जाता है। इन गड्ढों, डबरों में जमा पानी मच्छरों की तादात बढ़ाता है। घर के कूलर, फ्रिज, एसी, गमला, टंकी आदि में लंबे समय तक पानी जमा रहने से मच्छरों का खतरा बढ़ता है। इसलिए समय-समय पर इनकी सफाई का ध्यान रखा जाना चाहिए।

कोरोना के साथ डेंगू बढ़ा सकता है खतरा: कोरोना काल में डेंगू व मच्छरों के काटने से होने वाली अन्य बीमारियां खतरा बढ़ा सकती हैं। विक्टोरिया अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके वर्मा ने बताया कि कोविड-19 के ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिसमें मरीज एक से ज्यादा रोगों से ग्रस्त रहा। अभी कोरोना का खतरा पूरी तरह नहीं टला है। इसकी तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। जिससे बच्चों को बचाए रखना आवश्यक है।

हर रोज मिल रहे ब्लैक फंगस के मरीज: कोरोना का खतरा कम हुआ है परंतु ब्लैक फंगस के मरीज रोजाना सामने आ रहे हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अलावा शहर के कुछ निजी अस्पतालों में इस बीमारी से पीडि़त मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। मेडिकल में नाक कान गला रोग विभाग द्वारा रोजाना ब्लैक फंगस के मरीजों की नेजल एंडोस्कोपी की जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि ब्लैक फंगस अब तेजी से हमला कर रहा है।

गत माह की तुलना में नए मरीजों की संख्या में कमी आई है। परंतु जो नए मरीज मिल रहे हैं उनमें से ज्यादातर के मस्तिष्क में ब्लैक फंगस का संक्रमण फैल चुका है। ऐसे मरीजों की जान बचाने के लिए मेडिकल व सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में चिकित्सकों की टीम 24 घंटे सेवाएं दे रही है। मेडिकल कॉलेज नाक कान गला रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कविता सचेदवा ने बताया कि ब्लैक फंगस के संभावित लक्षण सामने आने के बाद बिना देर किए चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि डीन डॉ. प्रदीप कसार के निर्देश पर उपचार की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपचार में उपयोगी इंजेक्शन व अन्य दवाओं की कमी नहीं है।

Posted By: Ravindra Suhane

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