जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट ने एक याचिका का इस निर्देश के साथ पटाक्षेप कर दिया कि एसपी दमोह दहेज प्रताड़ना के कारण आत्महत्या के आरोप के मामले में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करें। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता दमोह निवासी रुकमणि विश्वकर्मा व प्रेमलाल विश्वकर्मा की ओर से अधिवक्ता भूपेंद्र कुमार शुक्ला ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की पुत्री ने ससुराल में दहेज प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में दमोह के संबंधित थाने में महज मर्ग कायम कर जिम्मेदारी पूरी कर ली। जब याचिकाकर्ताओं की ओर से इंसाफ की आवाज उठाई गई, तब महज मृतका की जेठानी को आरोपित बनाया गया। जबकि मुख्य संदेही मृतका के पति व सास-ससुर सहित अन्य के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध नहीं किया गया। पुलिस के इस रवैये के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उनकी पुत्री ने दहेज प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या की है, इसलिए कोई दोषी बचना नहीं चाहिए।

आयुक्त तकनीकी शिक्षा 60 दिन में शिकायत दूर करें : न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने एक याचिका का इस निर्देश के साथ पटाक्षेप कर दिया कि आयुक्त तकनीकी शिक्षा याचिकाकर्ता की शिकायत का 60 दिन के भीतर निराकरण करें। अधिवक्ता भूपेंद्र कुमार शुक्ला ने दलील दी कि याचिकाकर्ता खंडवा निवासी योगेश गीते सहायक ग्रेड-थ्री के पद पर कार्यरत था। उसे शिकायत के आधार पर एकपक्षीय तरीके से बर्खास्त कर दिया गया। उसने इस आदेश के खिलाफ विभाग में अपील प्रस्तुत की थी। लेकिन समक्ष प्राधिकारी ने अब तक अपील पर निर्णय नहीं लिया। अपील लंबित होने के खिलाफ हाई कोर्ट आना पड़ा।

Posted By: Brajesh Shukla

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