जबलपुर, नईदुनिया प्रतिन‍िधि। हाई कोर्ट ने एक शिक्षक द्वारा अपने स्थानांतरण के खिलाफ तथ्य छिपाकर दायर याचिका 25 हजार रुपये जुर्माने सहित निरस्त कर दी। गलती पकड़े जाने पर याचिकाकर्ता ने याचिका वापस किए जाने का निवेदन किया लेकिन कोर्ट ने कड़ाई बरतते हुए जुर्माना लगा दिया।

न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने मामले से संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी व प्राचार्य को यह चेतावनी भी दी कि भविष्य में स्थानांतरण से जुड़े मामलों में शासन की नीति के अनुसार आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। याचिकाकर्ता का स्थानांतरण हो गया था, तो उसे कार्यमुक्त भी कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यह रवैया लापरवाही को दर्शाता है। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पैनल लायर मनोज कुशवाहा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता कन्हैयालाल सेन शासकीय उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय, केसली, सागर में माध्यमिक शिक्षक बतौर पदस्थ था। उसका स्थानांतरण शासकीय माध्यमिक विद्यालय, दुघरा कला, विकासखंड मालथोन कर दिया गया था। दोनों जगहों के बीच 150 किलोमीटर की दूरी है। इस आधार के अलावा मौजूदा स्कूल में रसायन शास्त्र विषय का एकमात्र शिक्षक होने व जहां स्थानांतरण किया गया है, वहां रसायन शास्त्र विषय का पद न होने जैसे आधार लिए गए हैं। मौजूदा विद्यालय में 24 पद स्वीकृत हैं, जिसके विपरीत महज 10 शिक्षक पदस्थ हैं। इसके अलावा स्थानांतरण तिथि के बाद याचिकाकर्ता चिकित्सा अवकाश पर चला गया था। यदि ऐसा है, तो संबंधित दस्तावेज संलग्न किए जाने चाहिए। लेकिन याचिकाकर्ता ने तथ्य छिपाकर याचिका दायर की है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि भविष्य में कोर्ट का कीमती समय खराब न करे। ऐसा करने पर सख्त कार्रवाई होगी।

Posted By: Brajesh Shukla

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