Jabalpur High Court News: जबलपुर। हाई कोर्ट ने नगर निगम जबलपुर के आयुक्त की ओर से नगर विक्रय समिति भंग किये जाने के आदेश को निरस्त कर दिया। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की युगलपीठ ने नियम 2017 की कंडिका-नौ का पालन करते हुए समिति में रिक्त पदों पर सदस्यों की नियुक्ति के लिए विधिपूर्ण कार्यवाही के निर्देश दिए। शशिकांत सोनी, सदस्य, नगर विक्रय समिति, नगर पालिक निगम जबलपुर की ओर से हाई कोर्ट में यह याचिका दायर की गई। अधिवक्ता आलोक वागरेचा, विशाल बघेल व दीपक तिवारी ने कोर्ट को बताया कि भारत सरकार ने स्ट्रीट वेंडर्स के संरक्षण हेतु स्ट्रीट वेंडर्स, जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन अधिनियम, 2014 पारित किया। इसकी धारा 36 के अनुसार, राज्य सरकार को इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियम बनाने का अधिकार है । इसी अनुक्रम में मध्य प्रदेश शासन द्वारा म.प्र. पथ विक्रेता, जीविका सरंक्षण व पथ विक्रय विनियमन नियम 2017 बनाये गए । इन नियमों के अधीन नगर निगम जबलपुर ने जुलाई, 2021 में नगर निगम आयुक्त की अध्यक्षता में 20 सदस्यों की नगर विक्रय समिति का गठन किया। इसमें याचिकाकर्ता को भी सदस्य के रूप में नामित किया गया था। किंतु मार्च 2022 में नगर निगम ने अचानक इस समिति को भंग कर दिया। इसका कारण समिति के एक सदस्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होना तथा एक अन्य के द्वारा समिति से नाम पृथक करने की इच्छा प्रकट करना बताया गया।उक्त आदेश को याचिका में चुनौती दी गई। कोर्ट के निर्देश पर नगर निगम की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रुपराह ने कोर्ट को बताया कि नियम 2017 की धारा 10 में नगर निगम आयुक्त को नगर विक्रय समिति को भंग करने के अधिकार प्राप्त हैं। उक्त शक्तियों को प्रयोग करते हुए यह समिति भंग की गयी।

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि नियम 2017 की कंडिका 9 के अनुसार भिन्न कारणों से समिति में रिक्त हुए पदों पर ही नवीन प्रक्रिया अनुसार नियुक्ति की जाना चाहिए। किन्तु आयुक्त ने उक्त नियम का पालन न करते हुए सम्पूर्ण समिति को भंग कर दिया, जो विधि विरुद्ध है। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने समिति भंग किये जाने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया ।

Posted By: Shivpratap Singh

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