जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश के जरिये वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ, डब्ल्यूसीआरएमएस की नवीन कार्यकारिणी को चार्ज लेने से रोक दिया है। यही नहीं संघ के कोष से किसी भी तरह की राशि निकालने पर भी अंकुश लगा दिया गया है। इस मामले में रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।

न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता सविता त्रिपाठी व एसके सिन्हा की ओर से अधिवक्ता जेके पिल्लई व मकबूल खान ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि वर्ष 2020 में वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ, डब्ल्यूसीआरएमएस के चुनाव में आरपी भटनागर को अध्यक्ष चुना गया था। कार्यकाल दो वर्ष का होता है। सात अक्टूबर को बैठक बुलाई गई और 12 अक्टूबर को रिपोर्ट पेश करनी थी। इसके बावजूद उक्त बैठक में भटनागर को हटाकर सीएम उपाध्याय अध्यक्ष पद पर काबिज हो गए। याचिका में बताया गया कि उपाध्याय ने नवीन कार्यकारिणी की सूची बनाकर रजिस्ट्रार को भेज दी। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पूरी प्रक्रिया नियम विरुद्ध तरीके से की गई है, इसलिए नवीन कार्यकारिणी को वैधानिक नहीं माना जा सकता।

गबन के आरोप का भी हुआ जिक्र : मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से संघ के कोष से हुए गबन का भी जिक्र किया गया। इस मामले में रेलवे नेताओं के फरार होने और उनकी अग्रिम जमानत अर्जियां मंजूर न होने का तथ्य रेखांकित किया गया। इस मामले में वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ, डब्ल्यूसीआरएमएस के अध्यक्ष आरपी भटनागर की शिकायत पर अपराध दर्ज हुआ है।

Posted By: Brajesh Shukla

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