जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिले के मुखिया कलेक्टर को एक पक्षीय तरीके से किसी को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं है। लिहाजा, गलती हुई है, तो सुधारी जाए। इसी निर्देश के साथ एक याचिका का पटाक्षेप कर दिया गया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मंडला कलेक्टर के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसके तहत ग्राम पंचायत हिरदेनगर के ग्राम रोजगार सहायक जगदीश प्रसाद मेहरा को पद से अलग कर दिया गया था। कलेक्टर ने मेहरा को पंचायत कार्य में अनियमितता के आधार पर पद से पृथक करने का आदेश जारी किया था।

उक्त आदेश के खिलाफ मेहरा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति संजय दि्वेदी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुईं इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पारितोष त्रिवेदी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आदेश पारित करते समय कलेक्टर ने नैसर्गिक न्याय सिद्धांत का पालन नहीं किया। याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसका जवाब प्रस्तुत होने के बाद भी कलेक्टर द्वारा जवाब पर कोई विचार न करते हुए पद से पृथक करने का आदेश पारित कर दिया गया। याचिकाकर्ता को जांच रिपोर्ट की प्रति नहीं दी गई, उसे अपने पक्ष में गवाह प्रस्तुत करने का अवसर न देकर पद से हटा दिया गया। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कलेक्टर का आदेश निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कलेक्टर के निर्देश दिए कि वे इस प्रकरण में याचिकाकर्ता को सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान कर आगे की कार्रवाई करें। इसी के साथ याचिका का पटाक्षेप कर दिया गया। इस आदेश से याचिकाकर्ता ने राहत की सांस ली। वह अनुचित आदेश की वजह से काफी परेशान था। अधिवक्ता परितोष त्रिवेदी ने पूरे मामले को समझने के बाद याचिका तैयार की और हाई कोर्ट के समक्ष मजबूती से तर्क रखे। जिसका नतीजा यह हुआ कि प्रशासन की गलती उजागर हुई और याचिकाकर्ता के साथ नाइंसाफी पर अंकुश लग गया।

Posted By: Brajesh Shukla

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