जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व क्षेत्र कंपनी प्रबंधन को संविदा कर्मचारियों की समस्या 90 दिन में दूर करने के निर्देश दिए हैं। विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेंद्र श्रीवास्तव के द्वारा अनेक वर्षों से लगातार संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए प्रयास किया जा रहा था। जब कोई नतीजा नहीं निकला तो हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। संविदा कर्मचारियों की समस्या के 25 बिंदुओं के आधार पर दायर याचिका की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राहतकारी आदेश पारित कर दिया। इसके तहत पूर्व क्षेत्र कंपनी प्रबंधन को 25 बिंदुओं पर नीतिगत नियमानुसार निर्णय लेने हेतु 90 दिन का समय दिया गया है। अधिवक्ता अभिलाष डे ने मामले की पैरवी की। मुख्य मांग यही है कि संविदा कर्मियों को हर तीन वर्ष में दिए जाने वाला ब्रेक समाप्त कर 60 वर्ष की उम्र तक अनुबंध किया जाए। बंद किया गया एनपीएस पुनः प्रारंभ किया जाए। 2015 की वेतन विसंगति दूर की जाए। संविदा कर्मचारियों का 20 लाख का बीमा एवं मेडिकल सुविधा दी जाए। एक फीसद इंक्रीमेंट की जगह तीन फीसद इंक्रीमेंट प्रतिवर्ष दिया जाए। वर्ष में दो बार घोषित महंगाई भत्ता दिया जाए। बेसिक में बढ़ोत्तरी की जाए। एक बोनस प्रमोशन जोखिम भत्ता रात्रि कालीन भत्ता एक्स्ट्रा वेतन आदि दिया जाए। आइटीआइ संविदा कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी में परिवर्तन किया जाए। विभागीय वरीयता के आधार पर संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।

नकली रेमडेसिविर मामले में धारा 302 का अपराध दर्ज करने पर उचित निर्णय करें : हाई कोर्ट ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता के आवेदन की विवेचना के उपरांत नकली रेमडेसिविर मामले में धारा 302 का अपराध दर्ज करने पर उचित निर्णय करें। जस्टिस विशाल धगट ने याचिकाकर्ता को यह भी स्वतंत्रता दी है कि यदि वह जांच अधिकारी की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है तो वह न्यायालय में परिवाद दायर कर सकता है। प्रकरण के अनुसार नरसिंहपुर निवासी राजेन्द्र राय को कोरोना के इलाज के लिए सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि नकली रेमडेसिविर इंजेक्क्शन लगाए जाने से 3 मई 2021 को राजेन्द्र राय की मौत हो गई। अधिवक्ता यश सोनी व अधिवक्ता रविन्द्र दत्त ने तर्क दिया कि नकली रेमडेसिविर लगाए जाने के मामले में सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा के खिलाफ धारा 302 का प्रकरण दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। सुनवाई के बाद एकल पीठ ने याचिका का निराकरण कर दिया है।

Posted By: Brajesh Shukla

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