जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इटारसी नगर पालिका के आरक्षण प्रक्रिया को लेकर राज्य शासन और राज्य चुनाव आयोग से 23 अगस्त तक जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने पूछा है कि जब आरक्षण नियमों के अंतर्गत कलेक्टर को विहित प्राधिकारी मध्य प्रदेश शासन के द्वारा नियुक्त किया गया है तो इटारसी नगर पालिका की आरक्षण की प्रक्रिया एसडीओ के द्वारा किस आधार पर की गई। इटारसी निवासी पूर्व पार्षद शंकरलाल यादव की ओर से दायर याचिका में इटारसी नगर पालिका की आरक्षण प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष त्रिवेदी ने तर्क दिया कि नगर पालिका के आरक्षण के संबंध में मध्यप्रदेश शासन द्वारा नियम बनाए गए हैं। नियम 5 के अंतर्गत राज्य शासन वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया करने हेतु विहित पदाधिकारी नियुक्त करती है। उपरोक्त नियम के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा नोटिफिकेशन कर समस्त कलेक्टरों को उनके अधिकार क्षेत्र में आरक्षण की प्रक्रिया करने हेतु विहित प्राधिकारी घोषित किया गया था। इटारसी नगर पालिका कि आरक्षण की प्रक्रिया के लिए कलेक्टर होशंगाबाद द्वारा अपने अधिकार एसडीओ इटारसी को उप प्रत्यायोजित कर दिए गए। जो कि विधि विरूद्ध है। इससे आरक्षण की प्रक्रिया स्वमेव शून्य हो जाती है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रशांत अवस्थी, असीम त्रिवेदी और अपूर्व त्रिवेदी ने भी पैरवी की।

नगरीय प्रशासन विभाग को पक्षकार बनाने के निर्देश : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अवैध कॉलोनियों के नियमितिकरण को चुनौती देने वाली याचिका पर नगरीय प्रशासन विभाग को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया है।

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर के प्रांताध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे व नयागांव, जबलपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता रजत भार्गव की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने 20 जुलाई को अध्यादेश जारी कर प्रदेश की अवैध कॉलोनियों को नियमित करने का निर्णय लिया है। याचिका में कहा गया है कि इस अध्यादेश से अवैध कॉलोनी बनाने वालों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही अवैध कॉलोनी बनाने वाले बच जाएंगे। शासन की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई कि इस मामले में नगरीय प्रशासन विभाग को पक्षकार नहीं बनाया गया है। सुनवाई के बाद डिवीजन बैंच ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर नगरीय प्रशासन विभाग को पक्षकार बनाया जाए।

Posted By: Brajesh Shukla

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