जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में कोरोना मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने राज्य शासन द्वारा पूर्व में प्रस्तुत सातवीं एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब राज्य में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मरीज ऑक्सीजन की कमी से मर रहे थे, तब मेडिकल कॉलेजों व सरकारी अस्पतालों में 204 वेंटीलेटर्स डिब्बों में बंद रखे थे। इससे बड़ी लापरवाही भला और क्या होगी? इसी तरह विगत रिपोर्ट के जरिये अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज के संबंध में सरकार की ओर से जो रेट तय किए गए हैं, वे भी आपत्ति के योग्य हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इनके जरिये बड़े व छोटे सभी अस्पतालों को एक श्रेणी में रखकर रेट निर्धारण की गलती की गई है। महानगरों व छोटे शहरों के बीच इलाज के स्तर को ध्यान में रखते हुए रेट का न्यायपूर्ण निर्धारण नहीं किया गया है। इस वजह से छोटे अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों को वहीं शुल्क चुकाना होगा, जो बड़े अस्पतालों में भर्ती मरीज चुकाएंगे। लिहाजा, पुनिर्विचार आवश्यक है।

महाराष्ट्र की तर्ज पर हो निजी अस्पतालों का ऑडिट : कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता नागरथ ने दलील दी कि महाराष्ट्र में निजी अस्पतालों का ऑडिट किया गया। जिसके बाद कोरोना मरीजों से अतिरिक्त वसूले गए 18 करोड़ रुपये वापस दिलाए गए हैं। इसी तरह की व्यवस्था मध्य प्रदेश में भी लागू होनी चाहिए। सरकार इस दिशा में गंभीरता से कार्रवाई करे।

राज्य ने उठाए गए कदमों की जानकारी दी : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व निर्देश के पालन में राज्य शासन की ओर से कोरोना को लेकर उठाए जा रहे कदमों के संदर्भ में आठवीं एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश कर दी। इसके जरिये जमीनी स्तर पर उठाए गए कदमों की जानकारी प्रस्तुत की गई। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद रिपोर्ट रिकॉर्ड पर लेते हुए अगली सुनवाई 21 जून को निर्धारित कर दी। इससे पूर्व राज्य शासन की ओर से महाधिवक्ता पुरुषेंद्र कौरव व अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेंद्र यादव ने पक्ष रखा। उन्होंने अवगत कराया कि हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों का सरकार पूर्ण गंभीरता से पालन सुनिश्चित कर रही है। इसके तहत चीफ मिनिस्टर रिलीफ फंड की ओर से 13, कोल इंडिया लिमिटेड की ओर से सात, डीआइजीइएओ की ओर से एक, भारत सरकार की ओर से 27, एचडीएफसी की ओर से एक, एनएचएआइ की ओर से नौ, पे-टीएम की ओर से एक व पीडब्ल्यूडी की ओर से 19 पीएसए प्लांट्स इंस्टॉल किए गए हैं। इसके अलावा हाई कोर्ट के पूर्व निर्देशानुसार कोविड मरीजों से इलाज का शुल्क लिए जाने की दिशा में भी ठोस कार्य किया गया है। इस संबंध में संशोधित अधिसूचना जारी कर दी गई है।

राज्य की ओर से वैक्सीनेशन को लेकर उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी आठवीं एक्शन टेकन रिपोर्ट के जरिये दी गई। जिसमें बताया गया कि ग्लोबल टेंडर की दिशा में गंभीरता से प्रयास जारी है। राज्य में वैक्सीनेशन बढ़ाए जाने को लेकर सभी संभावित उपाय अपनाए जा रहे हैं। निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर नजर रखी जा रही है। साथ ही सरकारी चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है।

Posted By: Brajesh Shukla

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