जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने व्याख्याता की बार-बार प्रशासनिक पद पर नियुक्ति किए जाने के रवैये पर जवाब-तलब कर लिया है। इसके लिए राज्य शासन सहित अन्य को चार सप्ताह का समय दिया गया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने पक्ष रखा।

नए सिरे से प्रशासनिक पद दे दिया : उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता का मूल पद व्याख्याता का है। इसके बावजूद उसे बार-बार प्रशासनिक पद पर बैठा दिया जाता है। वर्तमान में पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक विभाग में सहायक संचालक बना दिया गया है। बहस के दौरान कहा गया कि अदालत व कानून के प्रति अनादर दर्शाते हुए सहायक संचालक बना दिया गया। कोर्ट को अवगत कराया गया कि 13 मार्च, 2020 को याचिका खारिज करते हुए उनकी प्रशासनिक पद पर नियुक्ति को कठघरे में रखा गया था। लेकिन उसके महज छह दिन के बाद मनमाने तरीके से अदालत के पूर्व आदेश की सरासर अवहेलना करते हुए नए सिरे से प्रशासनिक पद दे दिया गया। यह रवैया अदालत व कानून के प्रति अनादर दर्शाने काफी है।

हत्या के आरोपित की जमानत अर्जी मंजूर : मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुजय पॉल की एकलपीठ ने जबलपुर के पनागर क्षेत्र में हत्या के आरोपित की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। आवेदकों की ओर से अधिवक्ता ओमशंकर विनय पांडे व श्रीमती अंचन पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आवेदक मार्च 2020 से जेल में बंद हैं। वस्तुस्थिति यह है कि आवेदकों को इस हत्याकांड में निराधार फंसाया गया है। दोनों बेगुनाह हैं। दुर्भावनावश उनका नाम उछाल दिया गया। प्रारंभिक एफआइआर में इनका नाम भी दर्ज नहीं था। बाद में पुलिस ने घर से उठाकर परेशान करना शुरू कर दिया। सेशन कोर्ट में पेश किया गया। जहां से जमानत अर्जी खारिज होने के कारण जेल भेज दिया गया। तीन माह से दोनों के परिजन परेशान हैं। चूंकि अभियोजन के पास इनके खिलाफ ठोस तथ्यों का अभाव है, अत: जमानत अपेक्षित है।

Posted By: Brajesh Shukla

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