जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में आर्मी की ओर से रिपोर्ट पेश कर बताया गया कि रिज रोड का गेट खोल दिया गया है। प्रशासनिक न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव व जस्टिस वीरेंदर सिंह की युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई तीन अगस्त को निर्धारित की है।

क्षेत्र में रहने वाले हो रहे परेशान : रिज रोड निवासी अनिल साहनी और दीपक ग्रोवर की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया कि आर्मी ने 20 मार्च, 2020 से रिज रोड का गेट बंद कर दिया है। इसकी वजह से धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, बीएसएनएल ट्रेनिंग सेंटर और उस क्षेत्र में रहने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आर्मी की ओर से पेश जवाब में कहा गया कि कोरोना के खतरे को देखते हुए रिज रोड का गेट बंद किया गया है। अधिवक्ता आदित्य संघी ने तर्क दिया कि कोरोना के दौरान देश में किसी भी सड़क को बंद नहीं किया गया है। पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने आर्मी को रिज रोड खोलकर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। आदेश के परिपालन में मंगलवार को रिपोर्ट पेश कर दी गई। हाई कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश की नाफरमानी के रवैये को आड़े हाथों लिया था। इसी के साथ जबलपुर की रिज रोड खोलकर आगामी सुनवाई 27 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दे दिए थे। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए उक्त व्यवस्था दी थी। इससे पूर्व जनहित याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी मॉर्निंग वॉक क्लब के सदस्य अनिल साहनी व दीपक ग्रोवर की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष रखा था। उन्होंने दलील दी थी कि हाई कोर्ट ने अपने पूर्व निर्देश में साफ कर दिया था कि कोविड का असर खत्म होने के मद्देनजर रिज रोड खोल दी जाए। इसके बावजूद लंबा समय गुजर गया लेकिन रिज रोड का सिविल लाइंस की तरफ का गेट अब तक बंद है। बावजूद इसके कि जबलपुर कलेक्टर के अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जबलपुर में वर्तमान में कोविड का महज एक मरीज है। ऐसे में रिज रोड खोली दी जानी चाहिए। ऐसा न किए जाने से धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट्स को आने-जाने में लंबा घुमावदार रास्ता तय करना पड़ रहा है। हाई कोर्ट ने इन तर्कों को सुनने के बाद नाराजगी जाहिर करते हुए केंद्र सरकार के अधिवक्ता विक्रम सिंह को पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत कराने की जिम्मेदारी सौंप दी थी।

Posted By: Brajesh Shukla

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