जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेन्द्र श्रीवास्तव की एकलपीठ ने आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के आरोप को अनुचित पाते हुए पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर निरस्त करने का आदेश सुनाया। इसी के साथ आरोपित रेणु दुबे सहित अन्य ने राहत की सांस ली। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं का पक्ष अधिवक्ता रावेन्द्र तिवारी ने रखा। उन्होंने दलील दी कि सिंगरौली निवासी देवेन्द्र दुबे ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद उसके पिता ने देवेन्द्र की पत्नी रेणु व सास-ससुर, फूफा ससुर के खिलाफ आत्महत्या दुष्प्रेरण की एफआईआर दर्ज करा दी। चूंकि आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के आरोप में सच्चाई नहीं है और न ही इस सिलसिले में पुलिस के पास ठोस सबूत हैं, अतः एफआईआर निरस्त की जानी चाहिए। ऐसे कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आए हैं, जिनसे यह साबित हो सके कि देवेन्द्र को उसकी पत्नी या उसके मायके वालों ने आत्महत्या के लिए उकसाया था। हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद सिंगरौली के पुलिस थाना जयंत में दर्ज धारा-306 व 34 की एफआईआर निरस्त करने का आदेश सुना दिया।

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