जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका के जरिए सोशल साइट्स फेसबुक-वाट्सएप पर भी केवायसी आईडी प्रूफ का प्रावधान लागू किए जाने पर बल दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आरएस झा व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने जनहित याचिकाकर्ता को इस संबंध में शासकीय गाइडलाइन पेश करने कहा है। इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।

मंगलवार को जनहित याचिकाकर्ता जबलपुर के अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने अपना पक्ष स्वयं रखा। उन्होंने दलील दी कि टेलीफोन कनेक्शन और बैंक अकाउंट खुलवाने सहित अन्य सुविधाओं के लिए केवायसी आईडी प्रूफ जमा करवाए जाने का प्रावधान किया गया है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि किसी तरह की गड़बड़ी होने पर यूजर के खिलाफ ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। कायदे से इसी तरह की व्यवस्था फेसबुक-वाट्सएप आदि सोशल साइट्स के यूजर्स पर भी लागू की जानी चाहिए। ऐसा इसलिए ताकि फेसबुक-वाट्सएप के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा सहित अन्य तरह के संवेदनशील मसलों पर गड़बड़ी करने वालों की धरपकड़ आसान हो।

फर्जी अकाउंट्स की भरमार- जनहित याचिका में कहा गया है कि फेसबुक-वाट्सएप आदि पर फर्जी अकाउंट्स की भरमार है। फर्जी ई-मेल भी भारी संख्या में मौजूद हैं। इनके जरिए अनुचित कार्यों को अंजाम दिया जाता है। वाट्सएप तो न्यूसेंस का हथियार जैसा बन गया है। इसके जरिए जनभावनाओं को भड़काने वाली पोस्ट खूब फैलाई जा रही हैं। ऐसे में 50 से अधिक सदस्यों वाले ग्रुप्स में पुलिस से संबंधित एक सदस्य अनिवार्य किया जाना चाहिए।

शासकीय विभागों को लेकर गाइडलाइन- सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जनहित याचिकाकर्ता से सोशल मीडिया को कंट्रोल करने के संबंध में किसी गाइडलाइन के बारे में जानकारी देने कहा। इस पर जनहित याचिकाकर्ता ने साफ किया कि फिलहाल शासकीय विभागों को लेकर गाइडलाइन बनी हुई है, लेकिन वह आम यूजर्स पर लागू नहीं होती। कोर्ट ने इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लेकर गाइडलाइन पेश करने कह दिया।

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