जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिले में वर्ष 2011 से लेकर 2018 की स्थिति में समर्थन मूल्य पर गेहूं-धान खरीदी के घोटाले हुए। इन सभी प्रकरणों में जांच हो चुकी है और अभी तक तीन प्रकरणों में एफआईआर भी दर्ज कर ली गई। लेकिन 4 करोड़ से ज्यादा की राशि को वसूलने के लिए अब सहकारिता विभाग अपने ही कोर्ट में वसूली के प्रकरण दायर करेगा। घोटाले की राशि शासन के खाते में जमा नहीं करने वालों की चल-अचल संपत्ति कुर्क भी की जा सकती है। सहकारिता कोर्ट में प्रकरण दायर करने की तैयारी भी प्रारंभ हो चुकी है।

यह हैं मामले

- शहपुरा की घुंसौर समिति में वर्ष 2012-13 से 2014-15 में गेहूं गड़बड़ी की गई। इस समिति के प्रबंधक रामाधार नंदशेरियां और केंद्र प्रभारी मुन्नालाल साहू से वसूली की जाएगी। इसी समिति में वर्ष 2013-14 में गेहूं का 11 लाख 58 हजार का भुगतान ज्यादा कर दिया गया। यह राशि समिति प्रबंधक नंदशेरियां से वसूल की जाएगी। इसी वर्ष फिर से 872 क्विंटल गेहूं गोदाम में कम निकला। इस गेहूं की 13 लाख से ज्यादा की राशि वसूलने का नोटिस जारी हुआ है। वर्ष 2014-15 में फिर से प्रबंधक नंदशेरियां ने गड़बड़ी की थी और 9 लाख से ज्यादा का गेहूं गोदाम में कम निकला। इसकी बकाया राशि को वसूला जाना है।

- पाटन की सरौंद समिति में 2 करोड़ 93 लाख से ज्यादा का गोलमाल हुआ था। 2012-13 से 2015 तक की जांच में यह गड़बड़ी सामने आ चुकी है। इसमें समिति प्रबंधक प्रेमनारायण अहिवासी, विश्वनाथ गोंटिया, गेंदालाल पटेल, मेहरबान सिंह, यज्ञनारायण पटेल, संदीप गर्ग, भूपत पांडे, राजकुमार, ऑपरेटर सचिन दुबे, अमित यादव, मनोज पटेल, मनोज गोस्वामी से यह राशि वसूल की जाना है।

- पाटन की ही उड़ना मेढ़ी समिति में धान का किसान को ज्यादा भुगतान कर दिया गया था। इस घोटाले में शामिल केंद्र प्रभारी अनरुद्ध गोंटिया, संदीप दुबे ऑपरेटर, जुगल किशोर सहायक प्रभारी से वसूली की जाना है।

- बरेला और पड़वार समिति में वर्ष 2013-14 में धान और गेहूं की खरीदी के बाद परिवहन के दौरान उपज घटी मिली थी। उस दौरान 1 लाख 97 हजार का गबन सामने आया। समिति प्रबंधक अनंतराम बड़गैया से राशि वसूल की जाएगी।

- सहकारी समिति नगना में वर्ष 2011-12 में 11 लाख से ज्यादा का घोटाला किया गया था। समिति प्रबंधक एवं विक्रेता विजय तिवारी पर आरोप सिद्ध हो चुके हैं, इनसे भी वसूली की जाएगी।

वर्जन

सहकारिता कोर्ट में अलग से प्रकरण दायर होंगे। जो लोग राशि नहीं देते हैं, उनकी संपत्ति कुर्क करने का अधिकार सहकारिता नियमों में है।

पंकज गुप्ता, सीईओ सहकारी बैंक