जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिले में नामांतरण के बाद यदि कोई दूसरा सबसे मुश्किल काम सीमांकन कराना है। लोगों के आवेदनों पर महीनों बाद भी कोई काम नहीं होता। क्योंकि जिला प्रशासन के पास एक पटवारी ही ऐसा है, जिसे टोटल स्टेशन मशीन चलाना आता है। किसी व्यक्ति को यदि सीमांकन कराना है तो उसे निजी कंपनियों का सहारा लेना पड़ता है। शहर में सीमांकन कराने के अलग रेट हैं, और ग्रामीण क्षेत्र में कंपनी के इंजीनियर ज्यादा दाम वसूलते हैं। जिले में 230 से ज्यादा पटवारी हैं। कुछ की भर्ती पिछले 6 माह के दौरान हुई है। नए और पुराने पटवारियों को मशीन चलाना तक नहीं आता है। इस संदर्भ में अधिकारी भी ज्यादा जानकारी देने की स्थिति में नहीं है।

10 से 30 हजार का खर्च

- शहरी क्षेत्र में सीमांकन कराने के लिए निजी कंपनी के इंजीनियरों को 10 हजार से 15 हजार रुपए चुकाने पड़ते हैं। यदि शहर से बाहर यानी ग्रामीण क्षेत्र में सीमांकन कराना पड़े तो यह रकम 15 हजार से 30 हजार तक वसूली जा रही है। यह रकम देने के बाद भी समय सीमा की कोई गारंटी नहीं दी जाती। आवेदन के 1 माह में बहुत कम लोगों के सीमांकन होते हैं। यहां तक की मदन महल पहाड़ी से लेकर अन्य सरकारी प्रोजेक्ट के लिए भी दूसरे सर्किल के आरआई-पटवारियों से काम लिया जा रहा है।

1500 वर्गफीट का सीमांकन नहीं होता

- राजस्व नियम भी ऐसे बने है कि 1500 वर्गफीट प्लाट का सीमांकन नहीं किया जा सकता। नियमानुसार कम से कम 2 हजार वर्गफीट से ज्यादा का प्लाट होना चाहिए। ऐसी स्थिति में सिर्फ बटांकन के आधार पर ही खसरा-नक्शा तैयार किया जाता है। इस बात की जानकारी भी तहसीलदार नहीं देते हैं। बिना किसी आधार के आवेदनों पर सीमांकन आदेश जारी किए जा रहे हैं।

2011 में मिली मशीन गायब

- साल 2011 में राजस्व मद से जिले को 10 से ज्यादा टोटल स्टेशन मशीन प्राप्त हुई थीं। यह मशीनें सभी तहसीलों को वितरित कर दी गई। लेकिन इनको चलाने या सीमांकन करने की जानकारी इक्का दुक्का पटवारियों और आरआई को है। वर्तमान में अधीक्षक भू अभिलेख कार्यालय में भी पटवारियों को सीमांकन करना नहीं आता है।

जंजीर से भी नहीं होता काम

- शासन ने कुछ माह पहले टोटल स्टेशन मशीन के साथ जंजीर यानी जिराब से सीमांकन के आदेश जारी किए थे। लेकिन लोहे की जंजीर से कोई भी सीमांकन नहीं करता है। यह जंजीर सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र के लिए ही काम आती है। शहरी क्षेत्र में घनी आबादी वाले हिस्से में जंजीर काम नहीं करती।