भागवत कथा में डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य के प्रवचन

जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

भगवान अपनी विविध लीलाओं के द्वारा अधर्म का विनाश कर धर्म की स्थापना करते हैं। भागवत के अनुसार मथुरा नाम की एक नगरी है, यहां भगवान का नित्य निवास है। यह भी परम सत्य है कि परमात्मा सर्वत्र व्याप्त है, किंतु यथार्थ यह है कि उनका अनुभव सबको नहीं होता। उक्ताशय के उद्गार भागवत कथा की मीमांसा करते हुए व्यासपीठ से डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य ने धर्मसभा में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति को अपने जीवन में परमात्मा का अनुभव नहीं होगा तब तक उसके जीवन में अहंकार और बुराइयों का बोलबाला रहेगा। कथा के दौरान भगवान का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।

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भक्ति का महान पर्व है चालीसा व्रत

झूलेलाल मंदिर में स्वामी रामदास के प्रवचन

जबलपुर। सिंधी समाज की आस्था, श्रद्धा, भक्ति का महान पर्व है चालीसा व्रत। भगवान झूलेलाल ने अवतार लेकर सद्प्रवृत्ति का संवर्धन कर दुष्प्रवृत्ति का उन्मूलन किया एवं मानव समाज में एकता, समता, बंधुता के आदर्शों का क्रियान्वयन कर सर्वधर्म समभाव की गंगा प्रवाहित की। उक्ताशय के प्रवचन स्वामी रामदास ने झूलेलाल मंदिर में रविवार को दिए। कार्यक्रम में डीआईजी भगवत सिंह चौहान, डॉ. जितेंद्र जामदार, स्वामी अशोकानंद मंचासीन रहे। इस अवसर पर मोतीलाल पारवानी, ऊधवदास पारवानी, सोनू बचवानी, कन्हैयालाल आहूजा, लख्मीचंद खेमानी, रतन वासवानी, दिलीप मंगलानी, तुलसी आहूजा, दिलीप तलरेजा, अशोक चंदवानी, परसराम बजाज, दिलीप धीरानी, अनिल रोहरा, जितेंद्र ठक्कुर, प्रकाश वासवानी, अशोक लालवानी आदि उपस्थित रहे।

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सिंधु भवन में मनाया जन्माष्टमी महोत्सव

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जबलपुर। सिंधु सेवा समिति एवं युगल धाम पंचशील नगर का जन्माष्टमी महोत्सव सिंधु भवन घंटाघर में धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में भगवान कृष्ण के जीवन चरित्र एवं बाल लीलाओं पर प्रवचन एवं भजन हुए। स्वामी अशोकानंद ने भजनों से कृष्णमय मथुरा, वृंदावन सा माहौल बनाया। आयोजन में कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया, विधायक अशोक रोहाणी, विनय सक्सेना, चंद्रलाल शर्मा, करतार सिंह बठीजा, गणेश जेठवानी, दिलीप तलरेजा, उमेश पारवानी आदि उपस्थित रहे।

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गुरु कृपा से मानव जीवन की सार्थकता

संत निरंकारी मंडल में बलवान सिंह के प्रवचन

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जबलपुर। गोलबाजार स्थित संत निरंकार मंडल में अंबाला से आए केंद्रीय प्रचारक बलवान सिंह ने कहा कि मानव जीवन तब सार्थक होता है जब वह गुरु की कृपा से ईश्वर की अनुभूति कर लेता है। वह जानने लगता है कि ईश्वर हमारे अंग-संग है। उन्होंने कहा कि बिना जाने भी मानव प्रभु की आराधना करता है ऊपर उसे शाश्वत आनंद की अनुभूति नहीं होती। जब उसका परमात्मा के साथ साक्षात्कार हो जाता है तो उसकी आत्मा को परम आनंद प्राप्त होता है। संचालन महेंद्र दलपत एवं आभार प्रदर्शन नवनीत नागपाल ने किया। समागम में प्रमोद पांडेय, अरुण, सुमन, सुदीक्षा, तान्या, सीमा, अंज आदि ने भी भाव प्रकट किए।