जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

पैगंबर ए इस्लाम हजरत मुहम्मद (सल्ल) के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत के स्मृति पर्व मुहर्रम की तैयारियां मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में शुरू हो गई है। मुफ्ती ए आजम मप्र हजरत मौलाना मुहम्मद हामिद अहमद सिद्दीकी के अनुसार 31 अगस्त मुताबिक 29 जिल्हज को मुहर्रम शरीफ का चांद नजर आने की उम्मीद है। गौरतलब है कि पहली मुहर्रम से इस्लामी नया साल हिजरी सन 1441 का आगाज होगा। शहर में मुहर्रम का पर्व हजरत हमाम आली मुकाम के उर्स शरीफ के रूप में परंपरानुसार मनाया जाता है।

शहीदी कलामः

मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ध्वनि विस्तारकों पर मुहर्रम के शहीदी कलाम गूंजने लगे हैं। नालबंद मोहल्ला, मोतीनाला, गोहलपुर, मदार टेकरी, चारखंबा, अजीजगंज, नूरी नगर, ठक्करग्राम, भानतलैया, गलगला, फूटाताल, हनुमानताल, ओमती, नया मोहल्ला सहित सदर बाजार की गलियों एवं उपनगरीय क्षेत्र गढ़ा की मुस्लिम बस्तियों में शहीदी कलाम गूंज रहे हैं।

आकर्षक ताजियेः

मुहर्रम का प्रमुख आकर्षण ताजिया है जो हजरत इमाम हुसैन के रोजए मुबारक की झांकी के रूप में बनाए जाते हैं। मुस्लिम बहुल क्षेत्र मंडी मदार टेकरी निवासी मरहूम बाबा हलीम शाह के फर्जद मोहम्मद कलीम शाह व मुहम्मद शमीम शाह खानदानी ताजियादार हैं। शाह घराने में कई पीढ़ियों से ताजियादारी का काम हो रहा है। उनके बनाए ताजिया अन्य जिलों में भी जाते हैं।

कलात्मक सवारियां:

संस्कारधानी में मुहर्रम का एक अन्य प्रमुख आकर्षण सवारियां हैं। सवारियों की परंपरा दो सौ साल पुरानी है। वर्षों पहले सदर बाजार में कलात्मक सवारियों का निर्माण शुरू किया गया था, जो अब पूरे शहर में फैल चुका है। गढ़ा के पुराने मुजावर परंपरागत फूल मखाने वाली सवारियां बनाते हैं।

शिया समुदायः

नगर के शिया समुदाय द्वारा 10 दिवसीय मुहर्रम पर्व के दौरान इमामबाड़ों में प्रतिदिन सुबह से देर रात तक मजलिसों का एहतेमाम किया जाता है। दोपहर गलगला में महिलाओं की मजलिस आयोजित होगी। रात्रि में इमामिया हाल में मजलिस का एहतेमाम होगा। बोहरा समुदाय द्वारा भी पहली से दसवीं मुहर्रम तक कोतवाली बाजार स्थित जमात खाने में मजलिस का एहतेमाम किया जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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