जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। पाटन पुलिस अनुभाग में सक्रिय रेत माफिया से किसकी शह पर अधिकारी अवैध वसूली कर रहे हैं! एसडीओपी पाटन का नोट लेते हुए वायरल वीडियो ने इस पर बहस छेड़ दी है। कभी दबी जुबान तो कभी मुखर होकर लोग अब कहने लगे हैं कि बगैर प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं व प्रशासनिक संरक्षण के अधिकारी रेत माफिया से गठजोड़ कर ही नहीं सकते। सवाल यह उठाया जा रहा है कि अकेले पाटन अनुभाग से हर माह होने वाली लाखों की अवैध वसूली में कौन-कौन भागीदार बनता था।

सब कुछ जानकर भी चुप रहे अधिकारी

चर्चा है कि पाटन पुलिस अनुभाग में चल रहे वसूली के गोरखधंधे की अधिकारियों को जानकारी थी। वे सब कुछ जानकर भी चुप रहे। अनुभाग में खनिज का परिवहन व उत्खनन करने पर उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की जाती थी, जिनकी पुलिस से साठगांठ नहीं रही। बाद में वे भी शरणागत हो गए। चर्चा है कि कई बार विभाग के आला अधिकारियों को वसूली के गोरखधंधे की जानकारी दी गई थी। सूचना को पत्राचार तक सीमित कर दिया गया। हालात यह बने कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा कामकाज के सिलसिले में एसडीओपी पाटन कार्यालय भेजे गए कई चेतावनी भरे पत्रों का जवाब तक नहीं मिला।

चार प्रचलित किस्से (जैसा कि लोग दबी जुबान से चर्चा कर रहे हैं)-

पहला-

एसडीओपी द्वारा पैसे लेने का वीडियो विभाग के निचले स्टाफ ने बनाया है। एसडीओपी पहले जिस कर्मचारी के जरिए रेत माफिया से अवैध वसूली की रकम लेते थे, बाद में उसे दरकिनार कर दिया। और सीधी उसके बाद अमित अग्रवाल के जरिए वसूली करने लगे। जिससे नाराज होकर स्टाफ ने योजनाबद्घ तरीके से वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।

दूसरा-

रेत माफिया से वसूली के 20-22 लाख रुपए एक निचले स्टाफ के पास जमा थे। बाद में उसने रकम के बंटवारे से इनकार कर दिया। स्वयं पर कार्रवाई के भय से उसने एसडीओपी का वीडियो बनवाकर वायरल कर दिया।

तीसरा-

रेत समेत मुरम व शराब के अवैध कारोबारी परेशान थे। पुलिस ने उनसे जो महीना बांध रखा था, उसमें दो से तीन गुना वृद्घि कर दी गई। माफिया संगठित हुए और उन्होंने वीडियो बनाकर वायरल करवा दिया।

चौथा-

एसडीओपी के 5 वीडियो जारी हो चुके हैं। कुछ और वीडियो भी जारी हो सकते हैं। ये वीडियो करीब 15 दिन पूर्व बनाए गए थे। वीडियो वायरल करने का भय दिखाकर पहले एसडीओपी को ब्लैकमेल करने की कोशिश की गई बाद में वायरल कर दिया गया।

एसडीओपी पाटन द्वारा पैसे लेने के वायरल वीडियो मामले में पुलिस मुख्यालय रिपोर्ट भेज दी गई है। एक आरक्षक को निलंबित कर प्राथमिक जांच के निर्देश दिए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक साउथ को 5 दिन में जांच पूरी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मामले की जांच की जा रही है। अमित सिंह, एसपी

गिर सकती है गाज, पीएचक्यू रिपोर्ट भेजा

पाटन एसडीओपी एसएन पाठक को पद से हटाया जा सकता है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) भेजी गई रिपोर्ट में उन्हें पद से हटाने की अनुशंसा की गई है। वहीं पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर शहपुरा थाने में पदस्थ आरक्षक देवेन्द्र जाट को निलंबित कर दिया गया है। एएसपी साउथ डॉ. संजीव उइके को प्राथमिक जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें 5 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

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