जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

प्रदेश की सभी अदालतों में 23 सितम्बर से अनिश्चितकालीन हड़ताल के आसार नजर आ रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू न किए जाने और जजों की कमी दूर न किए जाने को लेकर वकील आक्रोशित हैं। यही वजह है कि स्टेट बार चेयरमैन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू किए जाने का प्रस्ताव राज्य के सभी अधिवक्ता संघों को भेजा है, इस संबंध में 14 सितंबर तक अपनी राय स्पष्ट करने कहा गया है।

स्टेट बार चेयरमैन शिवेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि राज्य शासन ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग को लेकर कई बार मौखिक आश्वासन दिया, लेकिन मांग अब तक पूरी नहीं हुई है। इस वजह से वकील असुरक्षित हैं। उन पर हमले हो रहे हैं। कैबिनेट बैठक में यह मामला रखे जाने की बात पर भरोसा करके पिछले दिनों मुख्यमंत्री आवास के सामने धरना दिए जाने का निर्णय वापस ले लिया गया था। इसके बावजूद कोई प्रगति देखने को नहीं मिल रही है। इसी तरह मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में स्थायी मुख्य न्यायाधीश का अभाव बना हुआ है। लंबित प्रकरणों के आधार पर हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के 17 अतिरिक्त पद भी अब तक स्वीकृत नहीं किए गए हैं। कुल स्वीकृत पदों में से 23 पद अब तक रिक्त हैं। इन सब वजहों से वकीलों को काफी परेशानी हो रही हैं। उनके द्वारा अपने पक्षकारों की ओर से दायर मामले सुनवाई के लिए नहीं आ पाते। इससे वकील और पक्षकार के बीच संबंध खराब हो रहे हैं। ऐसे में अब आर-पार की लड़ाई आवश्यक है।