जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) इन्द्रा सिंह की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपित ग्वारीघाट थाने में पदस्थ आरक्षक मयंक तिवारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की राशि पीड़िता को प्रतिकार बतौर दिए जाने की व्यवस्था दी गई है।

अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक स्मृतिलता बरकड़े ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि 13 मई 2017 को आरोपित पीड़िता के पिता का चेक बाउंस कराकर अरेस्ट वारंट लेकर घर पहुुंचा। उसने वर्दी का रौब दिखाया। इससे पूरा परिवार भयग्रस्त हो गया। आरोपित ने पीड़िता की मां को साइन करने कहा, लेकिन उन्होंने साइन नहीं किए। इस पर आरोपित उनका नंबर लेकर चला गया। बाद में पीड़िता की मां के साथ वॉट्सएप पर जुड़ गया। धीरे-धीरे उसका घर आना-जाना शुरू हो गया। इस दौरान उसकी बुरी नजर पीड़िता पर पड़ी और उसने दुष्कर्म शुरू कर दिया। नशे की गोलियां खिलाकर पीड़िता से कई बार दुष्कर्म किया। एक साल तक यह सब चला। अंततः मामला थाने पहुंचा। पुलिस ने पॉक्सो सहित अन्य धाराओं के तहत अपराध कायम किया। कोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद 10 साक्षियों के बयान दर्ज किए। इस तरह दोषसिद्घ पाकर सजा सुना दी।