जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में नर्मदा मिशन की जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान अमरकंटक व नेमावर में नर्मदा किनारे सिर उठा चुके अवैध धार्मिक निर्माणों की जानकारी बकायदे फोटोग्राफ्स के साथ पेश की गई। जिसके बाद महाधिवक्ता शशांक शेखर ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि राज्य की सीमा में नर्मदा किनारे हाईफ्लड-लेबल के भीतर हुए इस तरह के सभी अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आरएस झा व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता नर्मदा मिशन जबलपुर की ओर से अधिवक्ता सौरभ तिवारी खड़े हुए। वहीं महाधिवक्ता शशांक शेखर ने पूर्व निर्देश के पालन में रिपोर्ट पेश की। जिसके जरिए साफ किया गया कि नर्मदा के तिलवाराघाट तट के समीप हाईफ्लड-लेबल के दायरे के भीतर कुछ धार्मिक निर्माण होना पाया गया है। कोर्ट ने इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लेकर कड़े शब्दों में राज्य को दिशा-निर्देश जारी किए। इसके तहत साफ किया गया कि प्रदेश स्तर पर नर्मदा किनारे फ्लड-लेबल के भीतर जितने भी निर्माण किए गए हैं, उनका ब्योरा एकत्र किया जाए। साथ ही जिला, पंचायत आदि के अंतर्गत हुए इन अवैध निर्माणों को हटाए जाने के सिलसिले में गाइडलाइन बनाकर विधिवत सर्कुलर जारी किया जाए। यह प्रक्रिया 3 सप्ताह के भीतर पूरी करके रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

प्रमुख सचिव नहीं शासन के स्तर पर कार्य करें- इससे पूर्व महाधिवक्ता शेखर ने बताया कि प्रमुख सचिव के स्तर पर कार्ययोजना बनाई जा रही है। इस पर कोर्ट ने सख्ती बरतते हुए कहा कि प्रमुख सचिव नहीं बल्कि शासन के स्तर पर कार्ययोजना को गति दी जाए। साथ ही इस बात का भी पूरी गंभीरता से ध्यान रखें कि किसी भी तरह की राजनीतिक दखलंदाजी के बिना कार्रवाई को अंजाम दिया जाए।