जबलपुर। भक्ति माता ही श्री बल्लभ प्रिया हैं। ज्ञान और वैराग्य भक्ति माता के पुत्र हैं। भक्ति यदि ठीक से हृदय में बैठ जाए तो मन बुद्धि में निश्चिंतता आती है। उक्ताशय के प्रवचन शहीद स्मारक में चल रहे श्रीमद् भागवत तत्व चिंतन ज्ञान यज्ञ में स्वामी सुबोधानंद ने व्यासपीठ से व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जब चिंता मुक्त रहता है तब वह प्रभु के शरणागत रहता है तथा उसके मन में जिज्ञासा का जन्म होता है। जिज्ञासा ही ज्ञान, वैराग्य, आनंद का बोध कराती है। तब भक्ति का उद्देश्य पूर्ण होता है। इस दौरान गिरिराज चाचा, पं.रोहित दुबे, चित्रा माहेश्वरी, डॉ. केएन दुबे, विवेक अग्रवाल आदि मौजूद रहे।