जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

पश्चिम मध्य रेलवे एम्पलाइज यूनियन की चल रही भूख हड़ताल में बैठे पदाधिकारियों ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि डीआरएम कार्यालय के कई विभागों में काम कम और कमीशनखोरी ज्यादा चल रही है। बिना पैसे के काम नहीं किया जाता। सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार कोचिंग डिपो में है। सीडीओ द्वारा न सिर्फ काम में लापरवाही की जाती है, बल्कि कमीशनखोरी भी की जा रही है।

एम्पलाइज यूनियन की भूख हडताल के 12वें दिन शुक्रवार को मंडल से आए सैकडों रेल कर्मचारियों ने मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान वक्ताओं ने मंच से कहा कि रेलवे में कमीशनखोरी चरम पर है, लेकिन विभाग के आला अफसर मौन है।

हमारी मांगों को अनदेखा कर रहा रेल प्रशासन

डब्लूसीआरईयू के मंडल सचिव नवीन लिटोरिया ने कहा कि रेल कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर पिछले 11 दिनों से यूनियन कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। कर्मचारियों की जायज मांगें हैं, जिन्हें रेलवे प्रशासन अनदेखा कर रहा है। हमारी मांग है कि ट्रैकमैनों के रेस्ट हाउस में सुविधाएं बढ़ाई जाएं। डीआरएम ऑफिस में वाई-फाई और लिफ्ट लगाई जाए। इसके अलावा रेल आवासों में सुधार कार्य कराने से लेकर समयबद्घ प्रमोशन एमएसीपी, ओवर टाइम, रनिंग भत्ता का एरियर लगाया जाए।

जबलपुर कोचिंग डिपो में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार

यूनियन के मंडल अध्यक्ष बीएन शुक्ला ने कहा कि कोचिंग डिपो में भ्रष्टाचार चरम पर है। कोचिंग डिपो अधिकारी, सुपरवाइजर और कर्मचारियों पर दबाव डालकर 6 घंटे की बजाय 5 घंटे में प्राइमरी मेंटेनेंस करा रहे हैं, जिस कारण गाड़ियों में फेल्युर बढ़ने लगा है। उनके द्वारा मेंटेनेंस का सामान उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। ठेकेदारों के साथ डीलिंग करने वाले अधिकारी 7-8 सालों से एक ही पद पर जमे हुए हैं। पेस्ट कंट्रोल व रखरखाव पर किसी का ध्यान नहीं है।