जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

सरकारी स्कूलों के भारी-भरकम बिजली बिलों को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने चिंता जाहिर की है। इसी के तहत राज्य शिक्षा केन्द्र संचालक ने समस्त कलेक्टर्स को निर्देश जारी किए हैं कि घरेलू रेट पर सरकारी स्कूलों को बिजली उपलब्ध कराई जाए। अभी तक स्कूलों को व्यावसायिक दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है जिससे स्कूलों का बिजली बिल बहुत ज्यादा आ रहा है। राज्य शिक्षा केन्द्र संचालक ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि सरकारी स्कूल घरेलू दर से रोशन हों यह जिम्मेदारी उनकी है।

स्कूलों में व्यावसायिक बिजली कनेक्शन जोड़े गए हैं, परंतु घरेलू कनेक्शन के मुकाबले व्यावसायिक बिजली की दर अधिक है और बिल भरने के लिए स्वतंत्र आर्थिक प्रावधान नहीं है। स्कूल परिसर तथा इमारतों की मरम्मत, रंगरोगन, शौचालयों की स्वच्छता के लिए मिलने वाले वार्षिक निधि से बिजली बिल भरने की व्यवस्था की गई है। अगर बिजली बिल पर संपूर्ण निधि खर्च कर दें तो अन्य खर्च कहां से करें, यह समस्या स्कूलों के सामने खड़ी है। बिजली बिल भरने के लिए निधि कम पड़ने से कई स्कूलों की बिजली भी कट गई है।

4 करोड़ से अधिक का बिल बकाया

व्यावसायिक बिजली कनेक्शन होने से सरकारी स्कूल बिजली बिल के कर्ज में डूब गए हैं। जिले के 261 प्राथमिक-माध्यमिक स्कूल ऐसे हैं जिन पर बिजली बिल के 4 करोड़ से ज्यादा की राशि बकाया है। बिजली विभाग ने लंबित बिजली भुगतान को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग से पत्राचार किया है। इधर जिला शिक्षा अधिकारी ने प्राचार्यों से कहा कि जिन स्कूलों के बिजली बिल बकाया हैं वे विकासखंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से ई-पेमेंट करा दें। बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग के पास बिजली बिल जमा करने के लिए पर्याप्त राशि नहीं है इसलिए इतने स्कूलों का बिजली बिल बकाया है।

वर्जन....

कलेक्टर्स से कहा गया है कि सरकारी स्कूलों में घरेलू दर पर कनेक्शन के साथ बिजली उपलब्ध कराई जाए, क्योंकि अभी सरकारी स्कूलों का बिल काफी ज्यादा आ रहा है।

-आईरीन सिंथिया जेपी, संचालक, राज्य शिक्षा केन्द्र

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261 प्राथमिक-माध्यमिक स्कूलों के बिजली बिल बकाया है। बिल का भुगतान करने के लिए संबंधित प्राचार्य और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

-एसके नेमा, जिला शिक्षा अधिकारी

Posted By: Nai Dunia News Network

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