जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। चंपानगर रांझी निवासी देवाशीष को मौत के घाट उतारने के लिए ओमप्रकाश दुबे ने ही अपने बेटे हितेश को उकसाया था। घटना के साक्षियों के बयान से इस आशय के प्रमाण मिलने के बावजूद रांझी पुलिस ने ओमप्रकाश को क्लीनचिट दे दी थी। लेकिन नए थाना प्रभारी की जांच पड़ताल में ओमप्रकाश पर शिकंजा कस गया है। थाना प्रभारी ने पुलिस अधीक्षक को जांच रिपोर्ट से अवगत कराते हुए प्रकरण में ओमप्रकाश को भी आरोपित बनाए जाने के संबंध में अनुमति मांगी है।पुलिस मामले को लेकर कार्रवाई करने में लगी है।

यह है मामला-

चंपानगर रांझी निवासी देवाशीष चटर्जी (25) पिता प्रदीप चटर्जी पर रक्षाबंधन की रात करीब 10.30 बजे चंपानगर चौक के पास सिर पर पत्थर व पेट में चाकू से हमला कर मौत के घाट उतार दिया गया था। मौके पर पहुंची पुलिस को घटना के साक्षियों ने बताया था कि चंपानगर निवासी ओमप्रकाश दुबे ने अपने बेटे हितेश से देवाशीष पर जानलेवा हमला कराया था। देवाशीष अपनी माता और बच्चों के साथ रहता था। जब वह

प्रदर्शन कर सौंपा था ज्ञापन-

हत्या के लिए बेटे को उकसाने वाले ओमप्रकाश पर प्रकरण दर्ज न होने से आक्रोशित लोगों ने शव रखकर प्रदर्शन किया था।

किराए की दुकान का था विवाद-

बताया जाता है कि देवाशीष संजीवनी नगर में मेडिकल स्टोर चलाता था। पूर्व में उस दुकान को हत्या के आरोपित हितेश ने किराए पर लेकर काउंटर पर देवाशीष को बैठाया था। निर्धारित रकम न मिलने के कारण मालिक ने हितेश से दुकान की चाबी वापस ले ली थी।

कुछ दिन बाद दुकान मालिक ने देवाशीष को वही दुकान किराए पर दे दी। जिससे हितेश उससे रंजिश रखने लगा था। रक्षाबंधन की रात देवाशीष चौक पर खड़ा था तभी ओमप्रकाश के उकसाने पर हितेश ने उसकी जान ले ली।मेके तहत प्रकरण दर्ज करने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति मांगी गई है। नीरज वर्मा, टीआई, रांझी

Posted By: Nai Dunia News Network