जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जबलपुर रेलवे स्टेशन को नया स्वरूप देने का काम शुरू हो गया है। स्टेशन के रिडेवलपमेंट के तहत मुख्य रेलवे स्टेशन के सर्कुलेशन एरिया से प्लेटफार्म तक यात्री सुविधा के लिए होने वाले काम की शुरुआत प्लेटफार्म नंबर 6 से हो गई है। प्लेटफार्म नंबर 6 की मुख्य बिल्डिंग से लेकर नए वीआईपी गेट के बीच के हिस्से में वीआईपी लॉन बनाने का काम शुरू हो गया है। इसके साथ ही यहां एक होटल भी बनाया जा रहा है।

दरअसल हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर बने वीआईपी लॉन की तरह जबलपुर स्टेशन पर वीआईपी लॉन बनाया जाना है, जहां ट्रेन का इंतजार करने वाले यात्री निर्धारित शुल्क देकर आराम करने से लेकर टीवी, इंटरनेट का मजा ले सकेंगे।

एयरपोर्ट की तरह होगा सर्कुलेशन एरिया

जबलपुर रेल मंडल के इंजीनियरिंग विभाग ने एक साल पूर्व में ही स्टेशन रिडेवलपमेंट के तहत होने वाले कार्यों की योजना तैयार की थी। यहां तक कि यह काम पूरा होने के बाद स्टेशन का स्वरूप कैसे होगा, इसका एक आधुनिक मॉडल भी तैयार किया है, जो यात्रियों को देखने के लिए प्लेटफार्म नंबर 1 के सर्कुलेशन एरिया में रखा गया है। इसके तहत प्लेटफार्म नंबर 6 पर बनी कम्यूनिकेशन विभाग की रेड बिल्डिंग से पास ही होटल और लॉन बनाया जा रहा है। एयरपोर्ट की तरह प्लेटफार्म नंबर 6 और 1 का प्रवेशद्वार और गलियारा भी होगा।

टूटेगा मेट्रो बस स्टॉप का हिस्सा

स्टेशन की कायाकल्प योजना के तहत होने वाले काम में सबसे प्रमुख स्टेशन के सर्कुलेशन एरिया का विस्तार कर उसे सुविधाजनक बनाना है। इसके तहत प्लेटफार्म नंबर 6 के सर्कुलेशन एरिया की पार्किंग के हिस्से को चौड़ा करने से लेकर यहां आने वाले वाहनों के लिए वनवे रास्त बनाने का काम होना है। इसके लिए यहां बने मेट्रो बस स्टॉप को भी तोड़कर दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। वहीं स्टेशन रिडेवलपमेंट में इस ओर बने तीन मुख्य रास्तों को पार्किंग व्यवस्था सुधारने के लिए उपयोग किया जाएगा।

एक साल देरी से शुरू हुआ काम

रेलवे बोर्ड से पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर, भोपाल और कोटा मुख्य स्टेशन का विकसित करने के लिए निजी कंपनियों से टेंडर मंगवाया, लेकिन किसी ने भी रेलवे के इस योजना में रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद बोर्ड ने खुद ही इन स्टेशन को सुंदर और सुविधाजनक बनाने की योजना बनाई और इसका जिम्मा तीनों रेल मंडल के डीआरएम को दिया। यह काम दिसंबर 2018 तक पूरा होना था, लेकिन इंजीनियरिंग विभाग ने इस काम के लिए आर्किटेक्चर तय करने से लेकर ठेका देने तक में काम में ही एक साल का वक्त लगा दिया।

Posted By: Nai Dunia News Network