जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

महिलाओं पर हो रहे अपराधों की रोकथाम और घटित अपराधों की समय सीमा में विवेचना पूर्ण करते हुए अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने की दिशा में पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) सख्त हो गया है। दुष्कर्म के प्रकरण में 2 माह तथा अन्य महिला अपराधों में तीन माह के भीतर विवेचना पूर्ण न कर पाने वाले विवेचक पुलिस मुख्यालय के निशाने पर हैं। समय सीमा में विवेचना पूर्ण न होने पर सिर्फ विवेचक ही नहीं बल्कि अन्य संबंधित पुलिस अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय है। इधर, समय सीमा में विवेचना पूर्ण न होने की स्थिति में विवेचक को अतिरिक्त समय के लिए पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक व पुलिस उप महानिरीक्षक से अनुमति प्राप्त करनी होगी।

ये हैं पीएचक्यू के निर्देश-

-दुष्कर्म के प्रकरण में दो माह में विवेचना पूर्ण की जाए।

-अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत दर्ज प्रकरण की विवेचना एक माह में पूर्ण की जाए।

-ऐसे महिला संबंधी अपराध जिनमें विवेचना की समय सीमा निर्धारित नहीं है उसे भी तीन माह में पूर्ण की जाए।

-समय से विवेचना पूर्ण न करने पर संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच की जाएगी। जिसमें आईजी, डीआईजी, एसपी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी, सीएसपी व थाना प्रभारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

अधिकारी दे सकेंगे अतिरिक्त समय-

-महिला संबंधी अपराधों की विवेचना तीन माह से अधिक समय तक जारी रखने के लिए थाना प्रभारी अतिरिक्त समय प्राप्त कर सकेंगे।

-विवेचना के लिए पुलिस अधीक्षक एक बार में अधिकतम 1 माह और अधिकतम तीन बार (एक-एक माह) अनुमति दे सकेंगे।

-6 माह से अधिक विवेचना लंबित रखने के लिए पुलिस अधीक्षक की अनुशंसा पर उप पुलिस महानिरीक्षक एक बार में अधिकतम 2 माह और कुल अधिकतम 3 बार (6 माह तक) की अनुमति दे सकेंगे।

-1 वर्ष से अधिक विवेचना समय तक विवेचना जारी रखने की अनुमति पुलिस महानिरीक्षक एक बार में अधिकतम 3 अतिरिक्त माह की अनुमति दे सकेंगे।

-अवधि बढ़ाने से पूर्व अधिकारी समीक्षा करेंगे तथा यह बताना होगा कि किस वजह से विवेचना की अवधि बढ़ाया जाना आवश्यक है।

-प्रत्येक आदेश में विवेचना की नई समय सीमा का निर्धारण आवश्यक होगा।

-आरोपित से कोई जब्ती होनी है और फिर साक्ष्य बतौर उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाना है तो भी विवेचना लंबित ही मानी जाएगी।

धारा 173(8) के तहत होगी कार्रवाई-

महिला संबंधी अपराधों की विवेचना में विलंब और लापरवाही बरतने पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(8) के तहत कार्रवाई होगी। उन प्रकरणों में भी यह व्यवस्था लागू रहेगी जिनमें आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है और संबंधित न्यायालय से धारा 299 के तहत आरोपित की गैर हाजिरी में सुनवाई करने के लिए चालान पेश किया गया हो।

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महिला संबंधी अपराधों को लेकर पुलिस संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई कर रही है। शासन के निर्देश पर चिन्हित पुलिस थानों में ऊर्जा डेस्क का संचालन किया जा रहा है। ऐसे अपराधों की विवेचना समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश अधीनस्थों को दिए गए हैं। लापरवाही सामने आने पर मुख्यालय के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अमित सिंह, एसपी

Posted By: Nai Dunia News Network