जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। विशेष न्यायाधीश ज्योति मिश्रा की अदालत ने घर में घुसकर नाबालिग से छेड़छाड़ करने के आरोपित कुंडम निवासी महेंद्र कुमार व सतेंद्र कुमार की जमानत अर्जी खारिज कर दी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मामला गंभीर है, इसलिए आरोपितों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।अभियोजन के मुताबिक 10 जनवरी को कुंडम निवासी किशोरी के पिता और भाई बाजार गए हुए थे। वह घर पर अकेली थी। शाम सात बजे महेंद्र और सतेंद्र उसके घर पर पहुंचे।

उन्होंने परिजनों के बारे में पूछा तो नाबालिग ने बताया कि घर पर कोई नहीं है। इसके बाद उन्होंने पानी मांगा। इसके बाद आरोपित महेन्द्र ने नाबालिग का गला पकड़ लिया, नाबालिग ने चिल्लाने की कोशिश तो आरोपितों ने उसके मुंह में तौलिया ठूंस दिया। इसके बाद आरोपितों ने नाबालिग के साथ अश्लील हरकत की और उसके कपड़े फाड़ दिए। दूसरे दिन पंचायत बुलाई गई तो आरोपितों ने नाबालिग के परिजनों के साथ मारपीट की। अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी स्मृतिलता बरकड़े ने कहा कि यदि आरोपितों को जमानत का लाभ दिया गया तो साक्षय प्रभावित कर सकते है। सुनवाई के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

कलेक्टर का आदेश निरस्त, नए सिरे से सुनवाई के निर्देश : न्यायालय अतिरिक्त कमिश्नर, जबलपुर संभाग ने कलेक्टर सिवनी का पूर्व आदेश विधि विरुद्ध पाते हुए निरस्त कर दिया। साथ ही कलेक्टर को नए सिरे से दोनों पक्षों को सुनने के निर्देश दे दिए। अपीलकर्ता उमा की ओर से अधिवक्ता ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अपीलकर्ता या उसके अधिवक्ता को जानकारी दिए बिना कलेक्टर ने एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया। इससे अपीलकर्ता का नुकसान हुआ है। विवाद का बिंदु यह है कि जो गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन नहीं करती, उसे नियुक्ति का लाभ दे दिया गया। यह मामला सीधे तौर पर एक योग्य को दरकिनार कर उससे कम योग्य को नियुक्ति देने से संबंधित है।

Posted By: Ravindra Suhane

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