जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। प्राइमरी स्कूल खोले जाने पर मध्यप्रदेश जागरूक अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने विरोध जताया है। समिति के जिला अध्यक्ष रॉबर्ट मार्टिन ने जारी बयान में बताया कि प्राथमिक शालाओं में पढ़ने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चे स्कूल प्रारंभ होते ही जाना शुरु कर देंगे। शाला संचालन का समय सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक याने सात घंटे का होगा। इन सात घंटों में कोरोना और अब डेंगू के कहर से नौनिहाल कैसे सुरक्षित रहेंगे। ऐसे में बच्चों का संक्रमण से बचना मुश्किल जान पड़ता है।

सफाई भी नहीं होती: संघ पदाधिकारियों ने बताया कि कोरोना काल के चलते करीब दो सालों से स्कूल बंद हैं। कई स्कूलों में साफ-सफाई तक नहीं होती।आसपास का वातावरण भी साफ सुथरा नहीं है । वहीं कई स्कूलों के आसपास गंदगी होने से मच्छर बहुत अधिक हैं। जिससे डेंगू का खतरा बना हुआ है। कई स्कूलों की जर्जर हालत होने से छत से पानी रिस रहा है । बरसात होने से क्षतिग्रस्त भवनों के ढहने से लेकर बरसाती पानी से गंदगी और बीमारी फैलने का डर बना रहता है। ऐसी हालात में यदि सात घंटे तक बच्चे मास्क धारण, किए एक-दूसरे से पर्याप्त शारीरिक दूरियों कैसे रख पाएंगे।

बच्चे एक-दूसरे के साथ में खेलेंगे, भोजन करेंगे और एक ही टायलेट का उपयोग करेंगे। जिससे संक्रमित होने की संभावना बनी रहेगी। इसलिए जब तक कोरोना और डेंगू पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाता तब तक प्राइमरी स्कूल तीन से चार घंटे से ज्यादा संचालित न किए गए ।

समिति के के प्रांत अध्यक्ष उदित भदोरिया , हेमंत ठाकरे, दिनेश गौड़, गुडविन चार्ल्स , सुनील झारिया, एनोस विक्टर ,रवि जैन, आसाराम झारिया, उमेश ठाकुर ,योगेश ठाकरे ,समर सिंह ठाकुर, त्रिलोक सिंह, गोपी साह, विनोद सिंह, चेतनय कुसरे ,शरीफ अहमद अंसारी, रामकुमार कतिया ,एस.बी.रजक, निलेश खरे ,अनूप दहायत, ग्रीसकांत मिश्रा, अजय मिश्रा, प्रकाश मिश्रा, सुनील स्टीफन, मनीष मिश्रा, आशीष कोरी आदि ने शासन से मांग की है कि प्राथमिक शालाएं सिर्फ तीन या चार घंटे ही संचालित की जाए।

Posted By: Ravindra Suhane

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