जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिस तरह हाई कोर्ट बार चुनाव स्थगित करवा दिए गए ठीक वैसे ही जिला बार, जबलपुर के चुनाव को भी स्थगित कराने की कोशिश की जा रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि जो कारण हाई कोर्ट बार चुनाव को आगे बढ़वाने में काम आया, कमोवेश वहीं जिला बार के सिलसिले में भी सटीक बैठ रहा है। जैसे हाई कोर्ट में गिने-चुने वकील परिसर में नजर आते हैं, शेष घर या कार्यालय से पैरवी करते हैं, वैसे ही जिला अदालत के वकील भी कोर्ट कम ही आ रहे हैं। ऐसे में मतदान का प्रतिशत प्रभावित होने से इन्कार नहीं किया जा सकता।

अधिकतम प्रतिशत का मतदान ही चुनाव को पारदर्शी बनाता है : अधिवक्ता अमित कुमार साहू ने साफ किया कि जब तक मतदान का प्रतिशत ठीक न हो सही प्रतिनिधि में चयन की उम्मीद बेमानी हो जाती है। कायदे से अधिकतम प्रतिशत का मतदान ही जिला बार या हाई कोर्ट बार चुनाव को पारदर्शी बनाता है। बार कौंसिल आफ इंडिया ने हाई कोर्ट बार अध्यक्ष रमन पटेल की शिकायत को इसीलिए गंभीरता से लिया। बहरहाल, अब देखने लायक बात तो यही होगी कि जिला बार चुनाव को आगे बढ़ाया जाता है या नहीं। कोरोना की तीसरी लहर का खतरा भी इसका एक कारण बन सकता है। डेंगू के मरीज भी जिला अदालत में बढ़ते जा रहे हैं। यही वजह है कि जिला अदालत परिसर में अधिवक्ता तरुण कुमार रोहितास के नेतृत्व में लगातार छिड़काव की दिशा में प्रयास जारी हैं। वे डेंगू के मरीजों की संख्या को लेकर चिंतित हैं। सचिव राजेश तिवारी तक अदालत में मच्छरों के प्रकोप से बीमार पड़ चुके हैं। लिहाजा, सावधानी बरती जा रही है।

Posted By: Brajesh Shukla

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