जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। Fake Remdesivir Racket in Jabalpur। जिला अस्पताल विक्टोरिया के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल से रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के तार जुड़ गए हैं। एसटीएफ द्वारा की गई छानबीन में इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि इंजेक्शन की कालाबाजारी न सिर्फ जबलपुर बल्कि नरसिंहपुर व छिंदवाड़ा में भी की गई थी। बताया जाता है कि एसटीएफ की गिरफ्त में पूर्व में आ चुका मेडिकल का ठेका कर्मचारी कम्प्यूटर ऑपरेटर राहुल विश्वकर्मा विक्टोरिया के कर्मचारियों की साठगांठ से कालाबाजारी को अंजाम देता था।

वह अपने जान पहचान के लाेगों के आधारकार्ड के आधार पर उसी नाम से कम्प्यूटर से ओपीडी परची बनाकर रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए डिमांड भेजता था। जिस पर अंकित रहता था कि मरीज मेडिकल में भर्ती है जिसे पहले डोज के लिए दो इंजेक्शन की आवश्यकता है। वह फर्जी ओपीडी पर्ची विक्टोरिया अस्पताल के कर्मचारी राहुल विश्वकर्मा व जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डीजे मोहंती के वाहन चालक आनंद को देकर पहले डोज में लगने वाले दो रेमडेसिविर इंजेक्शन निकलवा लेता था। जिन्हें 19 से 25 हजार रुपये में बेचता था। फर्जी पर्ची पर विक्टोरिया के स्टोर से रेमडेसिविर इंजेक्शन निकलवाने पर वह राहुल व आनंद को 3-3 हजार रुपये रिश्वत देता था। विदित हो कि एसटीएफ ने राहुल व आनंद को 27 जून को गिरफ्तार किया था। मामले की जांच एसटीएफ एसपी नीरज सोनी के निर्देश पर डीएसपी ललित कश्यप द्वारा की जा रही है।

घर में मिली सात पर्ची: बताया जाता है कि एसटीएफ टीम ने आनंद के घर में सर्चिंग की जहां मेडिकल में बनाई गई सात फर्जी ओपीडी पर्ची मिली। पूछताछ में पता चला कि 11 अप्रैल को स्टोर में इंजेक्शन नहीं आए थे इस कारण पर्चियां लेकर वह घर चला गया था। पूछताछ में यह जानकारी भी सामने आई कि इस तिकड़ी ने विक्टोरिया व मेडिकल में भर्ती होने वाले कोरोना मरीजों के हक पर कई बार डाका डाला था। जो इंजेक्शन वास्तविक मरीजों के लिए जारी होते थे, फर्जी ओपीडी पर्ची पर कम कीमत पर प्राप्त कर उनकी कालाबाजारी करते थे।

फर्जी प्रमाण पत्र पर कई लोग बने डॉक्टर: रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी और फर्जी डिग्री के मामले में गिरफ्तार किए जा चुके नीरज साहू और नरेंद्र ठाकुर को एसटीएफ ने रिमांड पर लिया है। दोनों चिकित्सा की फर्जी डिग्री पर निजी अस्पतालों में बतौर ड्यूटी डॉक्टर सेवाएं दे रहे थे। इंजेक्शन की कालाबाजारी में पकड़े जाने के बाद दोनों के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच कराई गई तो वे फर्जी मिले। एसटीएफ की पूछताछ में यह जानकारी सामने आई थी कि दोनों ने दमोह से निजी महाविद्यालय के नाम पर फर्जी डिग्री बनवाई थी। फर्जी डिग्री बनाने वाले एक संदेही को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

विक्टोरिया में भर्ती मरीजों के इंजेक्शन भी बेचे: एसटीएफ की जांच में इस बात के प्रमाण मिले हैं कि विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों को इंजेक्शन न लगाकर उन्हें ज्यादा कीमत पर बेच दिया जाता था। कालाबाजारी को छिपाने के लिए मरीजों के उपचार संबंधी दस्तावेज में बड़ी होशियारी से इंजेक्शन लगाने का जिक्र कर दिया जाता था। एसटीएफ टीम मेडिकल व विक्टोरिया में भर्ती रहे उन मरीजों का रिकॉर्ड खंगाल रही है जिनके नाम पर रेमडेसिविर इंजेक्शन मंगाए गए थे। मरीजों अथवा उनके स्वजन से पूछताछ कर पता लगाया जाएगा कि उन्हें इंजेक्शन लगाए गए थे अथवा नहीं।

यह है मामला-

एसटीएफ की जबलपुर इकाई ने 19 अप्रैल को गंगानगर गढ़ा निवासी सुधीर सोनी व राहुल विश्वकर्मा को रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में पकड़ा था। दोनों 19-19 हजार रुपये में इंजेक्शन की सौदेबाजी कर रहे थे। दोनों से पूछताछ में पता चला कि संस्कारधानी हॉस्पिटल में कार्यरत राकेश मालवीय ने इंजेक्शन उपलब्ध कराए थे। राकेश को पकड़ा गया तो उसने दीक्षितपुरा निवासी व आशीष हॉस्पिटल में कार्यरत डॉ. नीरज साहू का नाम उगला। नीरज साहू को पकड़ने के बाद एसटीएफ उसकी निशानदेही पर डॉ. जितेंद्र ठाकुर तक पहुंच गई। गिरोह के छह सदस्यों को पकड़ा गया था जिसमें नागपुर में एक निजी अस्पताल में ड्यूटी डॉक्टर संगीता पटेल को भी गिरफ्तार किया गया।

Posted By: Ravindra Suhane

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