जबलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। गढ़ा रोड स्थित कमला नेहरु पार्क में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कथाव्यास अयोध्या प्रसाद उपाध्याय शास्त्री के सानिध्य में किया जा रहा है। श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन पंडित अयोध्या प्रसाद उपाध्याय शास्त्री ने मां सती व राजा दक्ष की कथा सुनाते हुए कहा कि पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा दक्ष प्रजापति भगवान ब्रह्मा के पुत्र और सती के पिता थे। सती भगवान शिव की प्रथम पत्नी थी। राजा दक्ष ने इस जगह एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सभी देवी-देवताओं, ऋषियों और संतों को आमंत्रित किया।

कथाव्यास ने कहा कि इस यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया था। इस घटना से सती ने अपमानित महसूस किया, क्योंकि सती को लगा कि राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया है। सती ने यज्ञ की अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और भगवान शिव ने अपने अर्द्धदेवता वीरभद्र, भद्रकाली और शिव गणों को कनखल युद्ध के लिए भेजा। वीरभद्र ने राजा दक्ष का सिर काट दिया। सभी देवताओं के अनुरोध पर भगवान शिव ने राजा दक्ष को जीवनदान दिया और उस पर बकरे का सिर लगा दिया। राजा दक्ष को अपनी गलतियों का एहसास हुआ और भगवान शिव से क्षमा मांगी। तब भगवान शिव ने घोषणा कि हर साल सावन के महीने में भगवान शिव कनखल में निवास करेंगे। यज्ञ कुण्ड के स्थान पर दक्षेश्वर महादेव मंदिर बनाया गया था।

परिवार बचाए रखने के लिए धैर्य, संयम की जरुरत

ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए कथावाचक अयोध्या प्रसाद शास्त्री ने समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य, संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न् करने की कथा को सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया है। इस अवसर पर केदारनाथ सिंह, गायत्री सिंह, योगेंद्र दुबे, नितिन अग्रवाल, दुर्गेश पांडेय, योगेन्द्र मिश्रा उपस्थित रहे।

भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ

जबलपुर। सनातन धर्म में श्रीमद्भागवत ऐसा महाग्रंथ है जिसे मस्तक पर धारण किया जाता है। इसे साक्षात श्रीकृष्ण ही माना गया है। श्रीमद् भागवत भक्ति ज्ञान वैराग्य और त्याग है। यह उद्गार भागवत कथा के शुभारंभ अवसर पर कथा व्यास पंडित आकाश ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत बार-बार सुनना चाहिए। श्रीमद्भागवत मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाने वाला ग्रंथ है। यह मोक्ष प्रदान करने वाला है। गोरखपुर समन्वय सेवा केंद्र में आयोजित कथा के शुभारंभ पर कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा शास्त्री ब्रिज से प्रारंभ होकर कथा स्थल पहुंची। सिर पर कलश लिए महिलाएं मंगल गीत गाती हुई आगे-आगे चल रहीं थीं। कथा प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 6 तक आयोजित होगी। भगवान का पूजन विष्णु दत्त गुप्ता, मधु गुप्ता, विशाल, विवेक ने किया।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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