जबलपुर, नईदुनिया रिपोर्टर। कोई सात वर्ष का है तो किसी की उम्र आठ और नौ वर्ष। तबले पर हाथों की अंगुलियां ऐसे चल रही थीं मानो कोई वरिष्ठ पारंगत वादक तबला वादन कर रहा हो। हाथ ही सफाई से बोलो का निकास हर दिल को प्रभावित कर रहा था। यहां तबला वादन चल रहा था और वहां ढेरों लाइक के शेयर फेसबुक पर आते जा रहे थे। अवसर था आरोह संगीत महाविद्यालय द्वारा आयोजित आनलाइन संगीत संध्या में बाल तबला वादकों की प्रस्तुति का। इस लाइव समारोह को सभी ने बहुत सराह साथ ही भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की उम्मीद जताई।

इस संगीत संध्या में जबलपुर के साथ ही औरंगाबाद और नागपुर से बाल तबला वादक जुड़ कर तबला वादन करेंगे। जबलपुर आरोह संगीत महाविद्यालय के छात्र रिद्धीश सिलावट, पिता पुनीत सिलावट ने परंपरा से हटकर ताल एकताल में स्वतंत्र वादन किया। जिसमें ताल एकताल में फिल्मी व बनारस घराने से कायदों का समावेश रहा। तोड़े-टुकड़ों की प्रस्तुति पढ़ंत के साथ प्रस्तुत की। औरंगाबाद से शरद डांगे के पुत्र चाणक्य गुरू ने ताल ित्रताल में बनारस घराने के पारंपरिक गत, चलन व कायदों को बखूबी प्रस्तुत किया। नागपुर से श्याम तेलंग के पुत्र श्रीरंग तेलंग ने ताल ित्रताल में स्वतंत्र तबला वादन किया। जिसमें पेशकार, कायदे, रेला, टुकड़े का समावेश रहा। संचालन प्रद्युम्न कायंदे ने किया। आयोजन को सफल बनाने में सुहासिनी कायंदे और संध्या पाठक का सहयोग रहा। आयोजकों द्वारा कोशिश की जा रही है कि आने वाले समय में भी इंटरनेट मीडिया के माध्यम से संगीत संध्या का यह आयोजन होता रहे।

Posted By: Ravindra Suhane

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