जबलपुर, नईदुनिया रिपोर्टर। लेखक अपने विचारों की अभिव्यक्ति करने के लिए स्वतंत्र है और ऐसा ही मैंने किया रामकथा लिख कर। कई लोगों ने मुझसे कहा कि जब तुलसीदास ने राम कथा लिख दी थी तो आपने क्यों लिखी। तब मैंने कहा कि ऐसा जरूरी नहीं है कि जिस विषय पर पहले लिखा जा चुका है उस पर दोबारा नहीं लिखा जा सकता। मैं खुद नहीं जानता कि मैं कब लेखक बना। और यह भी नहीं जानता था कि राम कथा को हिंदी में उपन्यास के रूप में लिखूंगा। इस दुनिया में कोई कुछ नहीं जानता कि क्या होने वाला है और वो खुद क्या करने वाला है। ये वो बाते हैं जो साहित्यकार नरेंद्र कोहली ने जबलपुर आने पर कहीं थीं। नरेंद्र कोहली के निधन पर शहर के साहित्यकार, लेखक अपने- अपने तरीकों से शोक जता रहे हैं और श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

श्री जानकीरमण कॉलेज के प्राचार्य डॉ अभिजात कृष्ण त्रिपाठी ने बताया कि 6 अक्टूबर 2017 में नरेंद्र कोहली जी जबलपुर आये थे। तब उनसे मुलाकात करने और साक्षात्कार करने का अवसर मिला था। अब जब उनके निधन की सूचना मिली तो वो सारे लम्हे आंखों के सामने झूल गए। नरेंद्र कोहली जैसे लेखक से मिलना मेरे जीवन के यादगार पलों में से है। वे हर विषय पर बड़ी बेबाकी से अपनी बात रखते थे। भारत देश में बहुत समस्यायें हैं इस विषय पर उन्होंने अपने साक्षात्कार में कहा था कि जितनी भी समस्याएं हैं वे सभी भारत में हैं और उनका हल भी हमारे पास हैं।ये भी सच है कि जिसके पास समस्यायें होती हैं हल भी उसी के पास होता है।

इस कोरोना के समय में शहर के साहित्यकारों के बीच इस खबर से शोक का माहौल है। सभी इन्टरनेट मीडिया के माध्यम से अपनो भावनायें व्यक्त कर रहे हैं। नरेंद कोहली का जाना बड़ी क्षति है।

Posted By: Ravindra Suhane

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