जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम के अंतर्गत वकील के आश्रितों के संबंध में जारी 19 मई, 2021 को जारी परिपत्र को निरस्त करने की मांग की गई है। अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच भारत की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता चंद्र कुमार वलेजा ने यह मांग उठाई है। उन्हाेंने अधिवक्ताओं के आश्रितों के हित कल्याण के विपरीत जारी परिपत्र को निरस्त करने तथा भारतीय उतराधिकार अधिनियम व हिंदू उतराधिकार अधिनियम और विधि द्वारा स्थापित नामिनेशन का प्रविधान पूर्व की भांति लागू करने पर बल दिया है।

नियमों की दी गई जानकारी : उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम 1982 की धारा-टू ई के संबंध में जारी परिपत्र के माध्यम से मृतक अधिवक्ता के वारिसों को परिभाषित किया गया है, जिसमे सिर्फ पति, पत्नी, माता, पिता, विधवा पुत्री और अविवाहित पुत्र को ही आश्रित की श्रेणी में रखा गया है। यह विधि द्वारा स्थापित अधिनियमों के विपरीत है। जबकि विधिक प्रावधान के अनुसार यदि कोई भी अपने जीवन काल में अपनी इच्छानुसार नामिनी नियुक्त करता है, उसी आश्रित व्यक्ति को राशि प्रदान की जाती है। यदि नामिनी नहीं किया गया है तो उस सूरत में जो भी वैधानिक वारिस की श्रेणी में आते हैं उनकी राशि का भुगतान किया जाता है, जो विधि अनुसार उचित है। परंतु आज उक्त परिपत्र जारी होने के बाद से मृतक अधिवक्ता के आश्रित अत्यधिक परेशान हो रहे हैं। उनकी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं। इसलिए अधिवक्ता के आश्रितों के हित कल्याण को पूर्व की भांति लागू किए जाने की मांग की गई है।

Posted By: Brajesh Shukla

NaiDunia Local
NaiDunia Local