जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। संविधान में 102वां संशोधन करके राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया है। इसका कार्यकाल तीन वर्ष में एक बार भी आयोग ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है, जबकि आयोग को ओबीसी वर्ग की सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक एवं राजनैतिक स्थिति का वार्षिक प्रतिवेदन राज्यपाल को देना अनिवार्य होता है। जिसके आधार पर ही सरकार नीतियों का निर्धारण करती है। उक्त प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किए जाने से ओबीसी वर्ग को देश एवं प्रदेश में समुचित न्याय नहीं मिल पा रहा है अर्थात जो पिछड़े वर्ग की जातियां विकास कर चुकी हैं उनको लिस्ट से हटाने तथा जो मौजूदा लिस्ट में नहीं है और अभी तक विकसित भी नहीं हुई है उनको लिस्ट में जोड़ने की कार्रवाई की जाती है परंतु आयोग ने अभी पिछड़ा वर्ग की स्थितियों का अध्ययन तह नहीं किया है। अर्थात मंडल आयोग के बाद आजादी से ये चौथा आयोग है। आयोग के उक्त उदासीनता के कारण मध्यप्रदेश के लगभग 17 संगठनों ने राष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री, सामाजिक न्याय मंत्रालय को ज्ञापन प्रेषित किए।

साक्ष्य के लिए तिथि तय : हाईकोर्ट ने बरगी विधायक के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर गवाही के लिए 21 अक्‍टूबर की तिथि तय की है। जस्टिस राजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने मामले में समय दिए जाने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है। कांग्रेस के बागी जितेन्द्र अवस्थी की ओर से दायर याचिका में कहा है कि वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र भरने के लिए जबलपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। रिटर्निंग आफिसर ने उन्हें पुलिस से कलेक्ट्रेट के बाहर करवा दिया। इसकी वजह से वह नामांकन पत्र नहीं भर पाए। जिससे चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत हो गई। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कांग्रेस विधायक की ओर से समय दिए जाने का अनुरोध किया। एकल पीठ ने 21 अक्‍टूबर से गवाही कराने की तिथि तय कर दी है।

Posted By: Brajesh Shukla

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