जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कुछ माह पूर्व एक मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन को साफ ताकीद दी थी कि जबलपुर के साथ भेदभाव न किया जाए। इसके बावजूद भेदभाव का रवैया बदस्तूर जारी है। इससे क्षेत्रीय संगठनों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट ने जबलपुर के कांग्रेस नेता सौरभ नाटी शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए तल्ख टिप्पणी की थी। हाई कोर्ट ने अपना मत व्यक्त करते हुए कहा था कि नगर निगम सीमा का दायरा नए वार्ड और उसमें शामिल गांवों के आने के साथ बढ़ गया है। लिहाजा, राज्य शासन को इसी के अनुपात में अपनी तरफ से सहयोग बढ़ाना चाहिए।

सीवर लाइन कार्य लंबे समय से कछुआ गति चल रहा : राज्य के कुल बजट का जो हिस्सा जबलपुर के विकास के लिए आवश्यक है, उसे निर्धारित और जारी करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। जनहित याचिकाकर्ता इसे दस फीसद मानता है, तो इस दिशा में ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद आलम यह है कि जबलपुर में सीवर लाइन कार्य लंबे समय से कछुआ गति चल रहा है। अन्य योजनाएं भी बेहद मंथर हैं। अब फ्लाई ओवर बनना शुरू हुआ है, तो संदेह उठने लगा है कि आखिर कब तक सड़कें खुदी पड़ी रहेंगी। यदि समुचित मॉनीटरिंग का अभाव रहा तो आशंका पर मुहर लगना तय है। इससे पूर्व कई सड़कों को बार-बार सीवर लाइन के लिए खोदा गया। फिर बनाया गया। फिर खोदा गया। इससे काफी जनधन बर्बाद हुआ। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रांताध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे ने इस सिलसिले में एक नई जनहित याचिका दायर करने की तैयारी कर ली है। उन्होंने बताया कि जबलपुर से कई विशेषताओं को छीन लिया गया है। आगे ऐसा न हो इसके लिए अलर्ट आवश्यक है। जनहित याचिका इसी मांग से सम्बंधित होगी। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय पैरवी करेंगे।

Posted By: Brajesh Shukla

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