जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी को लेकर सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखने की व्यवस्था दे दी। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस अतुल श्रीधरन की युगलपीठ के समक्ष शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन इस मामले की सुनवाई हुई। लगातार दो दिन से इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश बाहर आने का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन अभी निर्णय सुरक्षित रखा गया है। कोर्ट मित्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी बनी हुई है।

वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद मोहन माथुर ने निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट अनिवार्य किए जाने की मांग की है।वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर ने 36 घंटे के भीतर कोविड टेस्ट रिपोर्ट मुहैया न कराने का बिंदु रेखांकित किया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। संभवत: सोमवार को निर्णय बाहर आएगा।कोविड संकट के बावजूद ऑक्सीजन की आपूर्ति में समुचित गंभीरता न बरते जाने व रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी जारी होने को लेकर कोर्ट सख्त है।

अधिवक्ताओं के लिए कोविड केयर सेंटर शुरू : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार, हाई कोर्ट एडवोकेट्स बार व जिला बार, जबलपुर के प्रयासों से अधिवक्ताओं व उनके परिवार के सदस्यों के इलाज के लिए पृथक कोविड केयर सेंटर की सौगात मिल गई है। जिला बार के पुस्तकालय सचिव अधिवक्ता अमित साहू ने बताया कि कलेक्टर जबलपुर कर्मवीर शर्मा ने मांग को गंभीरता से लेकर शारदा नगर, रांझी के ज्ञानोदय होस्टल के भवन को कोविड केयर सेंटर में तब्दील करा दिया है।हाई कोर्ट बार सचिव मनीष तिवारी, एडवोकेट्स बार सचिव हरप्रीत सिंह रूपराह व जिला बार सचिव राजेश तिवारी ने वकीलों ने इस कोविड केयर सेंटर का लाभ लेने की अपील की है।

Posted By: Ravindra Suhane

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